इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस, पर बाजार ने दिखाया लाल झंडा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर को देश की आर्थिक तरक्की का मुख्य इंजन बनाने पर ज़ोर दिया गया है। इसका मकसद रोज़गार पैदा करना और प्रोडक्टिविटी बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया भारी निवेश मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट (Multiplier Effect) के ज़रिए जीडीपी (GDP) को बढ़ावा देगा। हालांकि, इन लंबी अवधि की योजनाओं के बावजूद, बजट पेश होने के दिन शेयर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आई, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: ₹12.2 लाख करोड़ का भारी आवंटन
बजट 2026-27 का सबसे अहम हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के लिए किया गया ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले 8.8% ज़्यादा है। यह पैसा सड़कों, रेलवे, शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण एसेट्स (Assets) पर खर्च किया जाएगा, जिससे रोज़गार और इकोनॉमिक ग्रोथ को गति मिलेगी। इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए, बड़े प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट डेवलपर्स का भरोसा बढ़ाने के लिए 'इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड' (Infrastructure Risk Guarantee Fund) का भी प्रस्ताव दिया गया है।
STT Hike ने बाजार को किया बेहाल
इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतने बड़े आवंटन के बावजूद, बजट वाले दिन स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) करीब 1,546 पॉइंट लुढ़ककर 80,722 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) 1.95% की गिरावट के साथ 24,825 के आसपास पहुंच गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह डेरिवेटिव्स (Futures and Options) पर STT का बढ़ाया जाना है। इस कदम से जहां एक ओर सट्टेबाजी कम होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर इसने ट्रेडर्स को डरा दिया और बाजार में फौरन बिकवाली शुरू हो गई, जिसने बजट की ग्रोथ-ओरिएंटेड बातों को फीका कर दिया।
सेक्टर-स्पेशल इनिशिएटिव्स और फिस्कल हेल्थ
इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, बजट में बायोफार्मास्युटिकल (Biopharmaceutical) सेक्टर के लिए भी बड़ा ऐलान हुआ है। 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma Shakti) प्रोग्राम के तहत अगले पांच साल में ₹10,000 करोड़ का आवंटन किया जाएगा, जिसका मकसद बायोलॉजिक्स (Biologics) और बायोसिमिलर्स (Biosimilars) के डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है। डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए, जो कंपनियां अपने इंडियन डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके दुनिया भर में क्लाउड सर्विसेज (Cloud Services) मुहैया कराएंगी, उन्हें 2047 तक टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) मिलेगा।
बजट में नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) को लिस्टेड इंडियन कंपनियों में इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स (Equity Investments) करने की इजाज़त दी गई है। साथ ही, छोटे टैक्सपेयर्स के लिए फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम (Foreign Asset Disclosure Scheme) भी लाई गई है। फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर भी सरकार का ध्यान है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) का लक्ष्य 55.6% रखा गया है, जो FY26 के 56.1% से थोड़ा कम है। वहीं, फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को जीडीपी के 4.3% पर लाने का अनुमान है।
भविष्य की राह और एक्सपर्ट्स की राय
इंडस्ट्री लीडर्स और इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि भले ही बाजार ने टैक्स बदलावों पर तुरंत रिएक्ट किया हो, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में किए गए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (Structural Reforms) भारत की ग्रोथ को लंबे समय तक बनाए रखेंगे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सीईओ ने कहा कि बाजार जल्द ही STT बदलावों को एडजस्ट कर लेगा, क्योंकि भारत की ग्रोथ की बुनियाद काफी मजबूत है। कैपिटल एक्सपेंडिचर पर लगातार ज़ोर देना और चुनिंदा सेक्टर्स में निवेश, भारत को लगातार आर्थिक विस्तार की ओर ले जाएगा, भले ही छोटी-मोटी अस्थिरता बनी रहे।