Union Budget 2026-27: कैपिटल एक्सपेंडिचर का बूस्टर डोज़, पर कर्ज़ का लोड?

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Union Budget 2026-27: कैपिटल एक्सपेंडिचर का बूस्टर डोज़, पर कर्ज़ का लोड?
Overview

Union Budget 2026-27 ने साफ कर दिया है कि सरकार का मुख्य फोकस अब कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के जरिए इकोनॉमी को गति देना है। इस बार Capex के लिए **₹12.2 लाख करोड़** का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो पिछले साल से **9%** ज्यादा है। इसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है।

इंफ्रा पर सरकार का दांव: Capex का तूफान!

इस बजट की सबसे बड़ी खासियत कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) पर अभूतपूर्व जोर है। सरकार ने Capex के लिए 9% की बढ़ोतरी करते हुए ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन किया है, जो GDP का 4.4% बैठता है। यह एक ऐतिहासिक कदम है जहाँ सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर, सरकार के नेट बोरोइंग (Net Borrowing) से भी ज्यादा होने वाला है। यह 'गोल्डन रूल' (Golden Rule) के अनुरूप है, जिसके तहत सरकार केवल प्रोडक्टिव एसेट्स (Productive Assets) में निवेश के लिए ही कर्ज़ लेती है। इस कदम से लंबी अवधि में इकोनॉमी का विस्तार, प्रोडक्टिविटी में बढ़त और इंटरेस्ट पेमेंट्स (Interest Payments) का बोझ कम होने की उम्मीद है। बता दें कि इंटरेस्ट पेमेंट्स अभी भी कुल सरकारी खर्च का 26% हैं। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक्स इस आक्रामक Capex पुश को पॉजिटिव बता रहे हैं, हालांकि कुछ का मानना है कि बढ़ी हुई बोरोइंग यील्ड्स (Yields) पर दबाव डाल सकती है।

फिस्कल चुनौती और राज्यों का कर्ज़

हालांकि केंद्र सरकार फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) बनाए रखने की कोशिश कर रही है, पर बजट में राज्यों के ऊंचे बोरोइंग लेवल (Borrowing Levels) से पड़ रहे दबाव का भी जिक्र है। माना जा रहा है कि राज्यों का लगातार कर्ज़ लेना, गवर्नमेंट सिक्योरिटी (GSec) की दरों को बढ़ा रहा है, जिससे सभी मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए फाइनेंसिंग कॉस्ट (Financing Cost) महंगी हो रही है। बाहरी राज्यों में कर्ज़ कम करना एक बड़ा लक्ष्य है ताकि मार्केट में स्थिरता आ सके।

वहीं, केंद्र सरकार अपने डेट-टू-जीडीपी रेशियो (Debt-to-GDP Ratio) को FY27 में 55.6% पर लाने का लक्ष्य रख रही है, जो FY26 के 56.1% से कम है। लंबी अवधि में इसे 2031 तक 50% ± 1% तक लाने का लक्ष्य है। FY27 के लिए ग्रॉस मार्केट बोरोइंग (Gross Market Borrowing) ₹17.2 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो उम्मीदों से ज्यादा है और यील्ड्स पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर पब्लिक सेक्टर बैंक्स (PSU Banks) के ट्रेजरी पोर्टफोलियो पर भी देखने को मिल सकता है।

टैक्स के मोर्चे पर बड़ी बात

टैक्सेशन के मोर्चे पर, सरकार ने ब्रॉड और इक्विटेबल टैक्सेशन (Equitable Taxation) के सिद्धांत को बरकरार रखा है। कैपिटल गेंस टैक्स (Capital Gains Tax) या फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) में बड़ी कटौती की मांग को फिलहाल नजरअंदाज किया गया है। इसका मकसद फेयरनेस (Fairness) बनाए रखना है। इसके बजाय, फोकस 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) रूल्स जैसी रिफॉर्म-कंसिस्टेंट इंसेटिव्स (Incentives) पर है ताकि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को आकर्षित किया जा सके।

पर्सनल इनकम टैक्स (Personal Income Tax) स्ट्रक्चर में AY 2026-27 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, विदेशी कंपनियों के लिए एक नई टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) का ऐलान किया गया है, जो भारतीय डेटा सेंटर्स के जरिए ग्लोबल क्लाउड सर्विसेज देंगी, यह 2047 तक लागू होगी। छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) भी प्रस्तावित है।

सेक्टर-स्पेसिफिक सपोर्ट और एग्जीक्यूशन की चुनौती

इकोनॉमिक डाइवर्सिटी (Economic Diversity) पर भी जोर दिया गया है। बजट मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing), सर्विसेज (Services) और एग्रीकल्चर (Agriculture) जैसे सेक्टर्स को सपोर्ट करेगा। हाई-टेक (High-tech) और एम्प्लॉयमेंट-इंटेंसिव (Employment-intensive) सेक्टर्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जैसे AI, हाई-टेक डेटा सेंटर्स और बायोफार्मा (Biopharma)।

हालाँकि, इन सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं की असली परीक्षा उनके एग्जीक्यूशन (Execution) और मॉनिटरिंग (Monitoring) पर निर्भर करेगी। सिर्फ फंड एलोकेट (Fund Allocate) करना काफी नहीं, असली नतीजा डिलीवर (Deliver) करने पर ही बजट का प्रभाव परखा जाएगा। टियर 2 और टियर 3 शहरों पर जोर देना एक अच्छा कदम है।

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