RBI का क्या कहना है?
RBI ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यूनियन बजट 2026-27, भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए एक रणनीतिक खाका पेश करता है। इसमें सख्त वित्तीय प्रबंधन और कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को बढ़ावा देने पर खासा ध्यान दिया गया है। सेंट्रल बैंक का मानना है कि यह देश की संपत्ति निर्माण (Asset Creation) की ओर एक सोची-समझी चाल है, जो आर्थिक क्षमता को बढ़ाएगी।
बजट के मुख्य बिंदु और चिंताएं
RBI ने यूनियन बजट 2026-27 का समर्थन करते हुए सरकार की फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) के प्रति प्रतिबद्धता को सराहा है। बजट में फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को GDP के 4.3% तक लाने का लक्ष्य है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 4.4% के रिवाइज्ड अनुमान से थोड़ा कम है। यह 2030-31 तक डेट-टू-GDP रेश्यो को 50±1% तक लाने के मध्यकालिक लक्ष्य के अनुरूप है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) इस बार भी भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ है। 2026-27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ (GDP का 3.1%) आवंटित किए गए हैं। अनुमान है कि इफेक्टिव कैपेक्स GDP के 4.4% तक बढ़ जाएगा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 3.9% से ज्यादा है। यह दिखाता है कि सरकार महामारी के दौर के मुकाबले अब कैपेक्स पर काफी ज्यादा खर्च कर रही है, जिसका सीधा असर प्रोडक्टिविटी बढ़ने और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने पर पड़ता है। वहीं, रिवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure) को GDP के 10.5% पर सीमित रखने का लक्ष्य है, जो पिछले साल के 10.8% से कम है।
आमदनी की बात करें तो, ग्रॉस टैक्स रिवेन्यू (Gross Tax Revenue) में पिछले साल के मुकाबले 8% की ग्रोथ का अनुमान है। यह ग्रोथ मुख्य रूप से इनकम टैक्स और यूनियन एक्साइज ड्यूटी से आने की उम्मीद है।
इन बातों पर उठ रहे सवाल?
हालांकि, बजट के इन लक्ष्यों को हासिल करने में कुछ चुनौतियां भी हैं। सरकार को 10% नॉमिनल GDP ग्रोथ की उम्मीद है, जो रिवेन्यू कलेक्शन के लिए अच्छी मानी जा रही है। लेकिन, ग्रॉस टैक्स रिवेन्यू में 8% की ग्रोथ का अनुमान कुछ खास टैक्स स्ट्रीम्स पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। सबसे बड़ी चिंता GST कलेक्शन को लेकर है, जिसके 3% तक कॉन्ट्रैक्ट (सिकुड़ने) का अनुमान लगाया गया है। यह थोड़ा चिंताजनक है, खासकर तब जब GDP ग्रोथ पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, टैक्स कलेक्शन की बयासी (buoyancy) भी पहले के मुकाबले कम रहने की संभावना है, जिसका मतलब है कि टैक्स कलेक्शन GDP के मुकाबले उतनी तेजी से नहीं बढ़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो, 4.3% का फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इमर्जिंग इकोनॉमीज के लिए 4% से ऊपर का स्तर लगातार चिंता का विषय बना रह सकता है। भारत का डेट-टू-GDP रेश्यो, हालांकि विकसित देशों के मुकाबले कम है, फिर भी इसे कम करने पर नजर है।
आगे क्या?
सरकार का लक्ष्य FY31 तक डेट-टू-GDP रेश्यो को 50±1% पर लाना है, जो फिस्कल प्रूडेंस (Fiscal Prudence) के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इकोनॉमिक सर्वे 6.8-7.2% के रियल GDP ग्रोथ और 10% नॉमिनल GDP ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है। यह रिवेन्यू कलेक्शन के लक्ष्यों का समर्थन करता है। बजट में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और MSMEs पर खास फोकस है, जिसका मकसद समावेशी और टिकाऊ ग्रोथ को बढ़ावा देना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निष्पादन (execution) में सटीकता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। यह भी देखना होगा कि क्या कैपिटल एक्सपेंडिचर का यह मौजूदा स्तर एक पीक पर पहुंच रहा है, क्योंकि हाल के संकेत बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपेंडिचर ग्रोथ धीमी हो रही है।