बजट 2026: निवेशकों को झटका! डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ा, बायबैक पर लगेगा कैपिटल गेन्स टैक्स

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
बजट 2026: निवेशकों को झटका! डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ा, बायबैक पर लगेगा कैपिटल गेन्स टैक्स
Overview

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने टैक्स वसूली को लेकर बड़ा कदम उठाया है। आम करदाताओं के लिए नियमों को आसान बनाने के साथ-साथ, **डेरिवेटिव्स (Derivatives)** पर **सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT)** को काफी बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, शेयर बायबैक (Share Buyback) पर अब **कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax)** लगेगा। ये बड़े बदलाव **1 अप्रैल, 2026** से लागू होंगे।

बजट 2026: टैक्स के मोर्चे पर बड़े बदलाव

वित्त मंत्री ने 2026-27 के अपने बजट में राजकोषीय ढांचे को मजबूत करने और अनुपालन बढ़ाने पर जोर दिया है। 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले ये प्रमुख बदलाव निवेशकों और कंपनियों की वित्तीय योजनाओं को प्रभावित करेंगे।

डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के लिए बढ़ी लागत

सरकार ने डेरिवेटिव्स मार्केट में सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी की है। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT अब 0.02% से बढ़कर 0.05% कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शन्स के लिए प्रीमियम और एक्सरसाइज दोनों पर प्रति ट्रांजैक्शन 0.15% STT लगेगा। इस कदम से शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और खासकर रिटेल निवेशकों की ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है।

शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू

एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए, शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को अब सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) के दायरे में लाया गया है। प्रमोटर्स के लिए इस पर अतिरिक्त टैक्स लगेगा, जिसमें कॉर्पोरेट प्रमोटर्स को 22% और गैर-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स को 30% की दर से टैक्स चुकाना होगा। उम्मीद है कि इससे बायबैक के जरिए टैक्स से बचने की कोशिशों पर लगाम लगेगी और माइनॉरिटी शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की तुलना में टैक्स का बोझ कम हो सकता है।

नए इनकम टैक्स एक्ट का आगाज

इस बजट की एक महत्वपूर्ण घोषणा इनकम टैक्स एक्ट, 2025 का लागू होना है, जो मौजूदा कानून की जगह लेगा। यह नया एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा और इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और कंप्लायंस को आम नागरिक के लिए आसान बनाना है।

विदेशी रेमिटेंस और संपत्ति घोषणा पर राहत

विदेशी रेमिटेंस पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) की दरें कम कर दी गई हैं। विदेशी टूर पैकेज पर TCS दर 2% कर दी गई है। इसी तरह, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्चों के लिए TCS दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है। इसके अलावा, सरकार ने एक बार की विदेशी संपत्ति घोषणा योजना भी पेश की है। इसके तहत, लोग 6 महीने के भीतर ₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा 30% टैक्स चुकाकर कर सकते हैं और अभियोजन से सुरक्षा पा सकते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण सुधार

प्रोसीजरल सरलीकरण के तहत, अब डिपोजिटरी फॉर्म 15G और 15H को केंद्रीकृत तरीके से जमा कर सकेंगे। इनकम टैक्स रिटर्न रिवाइज करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, और नॉन-ऑडिट मामलों के लिए फाइलिंग की समय सीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। साथ ही, व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले सभी ड्यूटीएबल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के लिए 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट जारी रहेगी। मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा प्राकृतिक व्यक्तियों को दुर्घटना मुआवजे के लिए दिया जाने वाला ब्याज अब टैक्स-फ्री होगा, जिससे संबंधित TDS भी खत्म हो जाएगा।

बाजार पर तत्काल असर और आगे की रणनीति

बजट में STT में बढ़ोतरी और बायबैक पर टैक्स के ऐलान के बाद बाजार में शुरुआती गिरावट देखी गई। प्रमुख सूचकांकों जैसे S&P BSE Sensex और Nifty 50 पर इसका असर दिखा। सरकार की रणनीति स्पष्ट रूप से टैक्स कंप्लायंस बढ़ाने और अनुपालन को औपचारिक बनाने पर केंद्रित है। हालांकि, डेरिवेटिव्स मार्केट पर STT के असर और नई टैक्स व्यवस्था के प्रभाव को आने वाले समय में देखा जाएगा, लेकिन सरकार का जोर राजस्व बढ़ाने और अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने पर है।

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