Union Budget 2026, जिसका देश को बेसब्री से इंतज़ार था, पेश हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने पर खास ज़ोर दिया है। इस बजट का लक्ष्य भारत की विकास क्षमता का फायदा उठाना है, खासकर सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा और टेक्सटाइल जैसे रणनीतिक उद्योगों में।
मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर
बजट का मुख्य फोकस देश के औद्योगिक आधार और कनेक्टिविटी को मज़बूत करना है। वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। इसके तहत सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडॉर को 'ग्रोथ कनेक्टर्स' के तौर पर विकसित करने और माल ढुलाई (Cargo Movement) की रफ़्तार बढ़ाने के लिए नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को 'Biopharma SHAKTI' स्कीम जैसी पहलों से बड़ा बूस्ट मिलेगा, जिसका मकसद भारत को बायोटेक्नोलॉजी हब बनाना है। साथ ही, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का विस्तार किया जाएगा ताकि चिप निर्माण को बढ़ावा मिले। सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) और केमिकल पार्क्स के लिए भी नए कॉरिडॉर और योजनाएं लाई है।
बाज़ार में शुरुआती गिरावट
हालांकि, इन ऐलान के तुरंत बाद शेयर बाज़ार में शुरुआती तेज़ी की जगह घबराहट दिखी। सेंसेक्स (Sensex) 1,000 अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया और निफ्टी (Nifty) 25,000 के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट की एक वजह डेरिवेटिव्स (Futures and Options) पर सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी और बजट के व्यापक वित्तीय और नीतिगत असर को निवेशकों द्वारा समझने की प्रक्रिया को माना जा रहा है। इसके बावजूद, IT और फार्मा सेक्टर के चुनिंदा शेयर मजबूती बनाए हुए दिखे।
आर्थिक लक्ष्य और प्रोज़ेक्शन
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) के अनुसार, FY27 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.8% से 7.2% के बीच बढ़ने की उम्मीद है। यह अनुमान रेगुलेटरी सुधारों और प्राइवेट सेक्टर के निवेश पर फोकस पर आधारित है। FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का लक्ष्य GDP का 4.3% रखा गया है, और डेट-टू-GDP रेशियो (Debt-to-GDP Ratio) घटकर 55.6% रहने का अनुमान है।
अन्य सेक्टरों को बूस्ट
बजट का विजन पर्यटन (Tourism) को भी बड़ा बूस्ट देगा, जिसमें ट्रेकिंग ट्रेल्स, आर्काइओलॉजिकल साइट्स को बेहतर बनाने और बुद्धिस्ट सर्किट के विकास पर काम होगा। माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए 'SME ग्रोथ फंड' और क्रेडिट गारंटी स्कीम के ज़रिए सपोर्ट का ऐलान किया गया है। रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) सेक्टर को भी पॉलिसी सपोर्ट जारी रहने की उम्मीद है। 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर ज़ोर है।
आगे क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को 'ऐतिहासिक' और 'अवसरों का राजमार्ग' बताते हुए 2047 तक 'विकसित भारत' का रोडमैप बताया है। हालांकि, इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के कार्यान्वयन (Execution) और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं (Global Trade Uncertainties) व विदेशी पोर्टफोलियो के बहिर्वाह (FPI Outflows) के बीच निवेशक के भरोसे पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कुल मिलाकर, बजट का लक्ष्य महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों को वित्तीय अनुशासन के साथ संतुलित करना है। बाजार में आई शुरुआती घबराहट के बावजूद, नीतिगत दिशा का मुख्य उद्देश्य स्थिर, दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। इन पहलों की सफलता प्रभावी कार्यान्वयन और आने वाले हफ्तों और महीनों में व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।