Union Budget 2026: बजट आते ही बाजार में हाहाकार! STT Hike और विरोध के चलते Sensex 1500 अंक लुढ़का

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Union Budget 2026: बजट आते ही बाजार में हाहाकार! STT Hike और विरोध के चलते Sensex 1500 अंक लुढ़का
Overview

भारत के यूनियन बजट 2026-27 के ऐलान के साथ ही शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई। Sensex **1500** अंकों से ज्यादा लुढ़का, वहीं Nifty 50 में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। इस गिरावट का मुख्य कारण डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।

बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट ने शेयर बाजार को तगड़ा झटका दिया है। बजट पेश होने के तुरंत बाद ही बेंचमार्क इंडेक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली। Sensex लगभग 1500 अंकों तक नीचे गिर गया, जबकि Nifty 50 में भी काफी गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग, खासकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में की गई बढ़ोतरी है। सरकार ने फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया है। ट्रेडर्स इसे सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश मान रहे हैं, लेकिन उन्हें डर है कि इससे मार्केट लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर बुरा असर पड़ सकता है।

बजट की मुख्य बातें और विरोधियों के तीखे तेवर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में विकास और वित्तीय अनुशासन का संतुलन साधने की कोशिश की। बजट का एक अहम आकर्षण कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) का रिकॉर्ड लक्ष्य रहा, जिसे फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ रखा गया है। यह मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के ₹11.2 लाख करोड़ के मुकाबले ज्यादा है। वहीं, FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को GDP के 4.3% पर लाने का अनुमान है, जो FY26 के अनुमानित 4.4% से कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर एक 'मील का पत्थर' बताया।

हालांकि, विपक्षी दलों ने बजट को "निराशाजनक", "पारदर्शिता विहीन" और "ग्राउंड रियलिटी से कोसों दूर" करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि बजट "भारत के वास्तविक संकटों के प्रति अंधा" है और इसमें युवाओं की बेरोजगारी, घटते मैन्युफैक्चरिंग, किसानों की पीड़ा और गिरती घरेलू बचत जैसे मुद्दों की अनदेखी की गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट को "हम्प्टी डम्प्टी" और "दिशाहीन" बताते हुए केंद्र पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार "अपने विचारों से बाहर निकल चुकी है" और बजट देश की आर्थिक व सामाजिक चुनौतियों का "कोई हल नहीं" पेश करता।

इंडस्ट्री का मिला-जुला रिएक्शन और आगे की राह

इंडस्ट्री की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। कुछ लोगों ने इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस की सराहना की, जबकि कुछ ने चिंताओं को व्यक्त किया। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में FY27 के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ 6.8-7.2% रहने का अनुमान लगाया गया था, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय बजट पर बाजार की प्रतिक्रियाएं अक्सर अस्थिर रही हैं। वर्तमान में, Nifty 50 का मार्केट P/E रेश्यो लगभग 22.12 है, जो यह बताता है कि बाजार पहले से ही काफी वैल्यूएड (overvalued) हो सकता है, और ऐसे में किसी भी प्रतिकूल घोषणा के प्रति अधिक संवेदनशील है। सरकार का इरादा कैपिटल एक्सपेंडिचर और फिस्कल कंसॉलिडेशन पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखने का है, जिसका लक्ष्य टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। बजट के प्रस्ताव, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर्स जैसे क्षेत्रों में टैक्स हॉलिडे (tax holidays) के प्रावधान, लंबी अवधि के आर्थिक विकास के लिए बनाए गए हैं। लेकिन, STT में बढ़ोतरी और विपक्षी आलोचनाओं के चलते निवेशकों की तत्काल भावना अनिश्चित बनी हुई है, जिससे बाजार में और उतार-चढ़ाव की आशंका है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.