फाइनेंस मिनिस्टर ने जैसे ही यूनियन बजट 2026 पेश किया, इंडियन इक्विटी मार्केट्स में तुरंत गिरावट देखी गई। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) का अप्रत्याशित बढ़ना और शेयर बायबैक (Share Buyback) पर टैक्सेशन के ढांचे में बदलाव था।
F&O पर STT को फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। ये बढ़त डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को महंगा बनाती है, जिससे सट्टेबाजी (Speculation) कम होने की उम्मीद है। साथ ही, बायबैक से हुई कमाई को सभी शेयरधारकों (Shareholders) के लिए कैपिटल गेन्स (Capital Gains) के तौर पर ट्रीट करने के फैसले से निवेशकों और प्रमोटर्स (Promoters) को अपनी होल्डिंग्स का फिर से मूल्यांकन करना पड़ा।
इसकी वजह से ब्रोकरेज फर्म्स (Brokerage Firms) और स्टॉक एक्सचेंजों (Stock Exchanges) के शेयरों में भी भारी गिरावट आई, जिसमें BSE और MCX जैसे स्टॉक्स शामिल हैं। शुरुआती रिएक्शन में डिफेंस स्टॉक्स (Defence Stocks) ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि PSU बैंक (PSU Banks) और मेटल सेक्टर (Metal Sector) में कमजोरी देखी गई। एनालिस्ट्स (Analysts) का कहना है कि यह रिएक्शन ज़्यादातर मैकेनिकल (Mechanical) था, लेकिन शॉर्ट-टर्म में ट्रेडिंग लिक्विडिटी (Liquidity) और कॉस्ट पर इसका असर चिंता का विषय है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट
मार्केट की गिरावट के बीच, बजट ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर एक मज़बूत जोर दिया है। FY27 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का लक्ष्य बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। खास घोषणाओं में दनकौर से सूरत तक एक डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (Freight Corridor), बीस नए राष्ट्रीय जलमार्गों (National Waterways) का जुड़ना और कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम (Coastal Cargo Promotion Scheme) शामिल हैं।
टियर II और टियर III शहरों को हाई-स्पीड रेल (High-speed Rail) और बेहतर लॉजिस्टिक्स (Logistics) से लैस इकोनॉमिक रीजन्स के तौर पर विकसित करने की योजनाएं भी हैं। यह इंफ्रा पुश डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग (Domestic Manufacturing) के लिए एक बड़े अपग्रेड के साथ आता है। सरकार ने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Semiconductor Fabrication) के लिए ISM 2.0 के तहत सपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स (Electronics Components), बायोफार्मा (Biopharma), कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (Construction Equipment) और स्पेशलाइज्ड मैटेरियल्स (Specialized Materials) के लिए टारगेटेड इन्सेंटिव्स (Incentives) की घोषणा की है।
200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स (Industrial Clusters) को रिवाइव करने और केमिकल पार्क्स (Chemical Parks) व कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स (Container Manufacturing Units) के ज़रिए क्षमता का विस्तार करने की योजनाएं हैं। एयरोस्पेस (Aerospace) और सीफूड प्रोसेसिंग (Seafood Processing) जैसे सेक्टर्स के लिए क्रिटिकल इनपुट्स (Critical Inputs) की कॉस्ट कम करने के लिए कस्टम ड्यूटीज़ (Custom Duties) में एडजस्टमेंट किया गया है।
स्ट्रेटेजिक सेक्टोरल बूस्ट
पारंपरिक क्षेत्रों से परे, बजट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स (Advanced Technology Supply Chains) में इंडिया की एंगेजमेंट को गहरा करने का संकेत देता है। डिफेंस बजट (Defence Budget) में करीब ₹7.85 लाख करोड़ की बढ़ोतरी, मिलिट्री रेडीनेस (Military Readiness) और आधुनिकीकरण (Modernisation) पर निरंतर फोकस को दर्शाती है।
बजट सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) और इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) में इंडिया की महत्वाकांक्षाओं को मज़बूत करता है, जिसमें सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semiconductor Mission 2.0) और रेयर अर्थ माइनिंग (Rare Earth Mining) में निवेश शामिल हैं। AI और डिजिटल इंफ्रा (Digital Infrastructure) के लिए एक स्पष्ट रणनीति में एनहांस्ड कंप्यूट कैपेसिटी (Enhanced Compute Capacity), क्लाउड सर्विसेज (Cloud Services) और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) के लिए ड्राइव्स शामिल हैं, जिसे फॉरेन डेटा सेंटर ऑपरेटर्स (Foreign Data Center Operators) के लिए लॉन्ग-टर्म टैक्स हॉलिडेज़ (Tax Holidays) का सपोर्ट मिलेगा।
हेल्थकेयर (Healthcare) सेक्टर में, 17 क्रिटिकल कैंसर ड्रग्स (Critical Cancer Drugs) पर कस्टम ड्यूटीज़ माफ़ कर दी गई हैं, ताकि एडवांस्ड ट्रीटमेंट्स (Advanced Treatments) ज़्यादा सुलभ हो सकें। बायोफार्मा सेक्टर (Biopharma Sector) को 'बायो फार्मा शक्ति' प्रोग्राम (Bio Pharma Shakti Program) और अगले पांच सालों में ₹10,000 करोड़ के आउटले (Outlay) के साथ भी बूस्ट मिलेगा।
फिस्कल प्रूडेंस और टैक्स का बदलता नज़रिया
सरकार ने एक कंज़र्वेटिव फिस्कल स्टांस (Conservative Fiscal Stance) बनाए रखा, FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को GDP का 4.3% पर रखते हुए कंसॉलिडेशन (Consolidation) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रॉस मार्केट बॉरोइंग (Gross Market Borrowing) स्थिर रहने की उम्मीद है, जो प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Private Investment) को क्राउड-आउट (Crowd-out) किए बिना डेफिसिट को मैनेज करने का इरादा दर्शाता है। डेट-टू-GDP रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) FY27 में घटकर 55.6% रहने का अनुमान है।
टैक्स रिफॉर्म्स (Tax Reforms) कंप्लायंस ट्वीक्स (Compliance Tweaks) से आगे बढ़ते हैं, जिनका लक्ष्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) का बोझ कम करना है। 1 अप्रैल 2026 से एक नया इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) लागू करने का इरादा एक मॉडर्न, स्ट्रीमलाइनड फ्रेमवर्क (Streamlined Framework) बनाना है। राहत उपायों (Relief Measures) में ओवरसीज टूर पैकेजेस (Overseas Tour Packages) और रेमिटेंसेस (Remittances) पर TCS में कमी, और मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल अवार्ड्स (Motor Accident Tribunal Awards) के लिए एग्ज़ेम्प्शन (Exemptions) शामिल हैं।
स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स से लॉन्ग-टर्म आउटलुक को सपोर्ट
मार्केट की शुरुआती वोलेटिलिटी (Volatility) के बावजूद, एनालिस्ट्स इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बजट का मुख्य हिस्सा लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल ग्रोथ ड्राइवर्स (Structural Growth Drivers) पर बना है। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure), इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) और मैन्युफैक्चरिंग इन्सेंटिव्स (Manufacturing Incentives) पर निरंतर फोकस से अलाइड सेक्टर्स (Allied Sectors) में महत्वपूर्ण दूसरे दर्जे के फायदे होने की उम्मीद है।
फॉरेन इन्वेस्टर्स (Foreign Investors) ऐसे बजट को पसंद करते हैं जो पॉपुलिस्ट स्विंग्स (Populist Swings) से बचते हैं, फिस्कल प्रेडिक्टेबिलिटी (Fiscal Predictability) और एक स्पष्ट ग्रोथ रोडमैप (Growth Roadmap) को महत्व देते हैं। बैंकिंग रिफॉर्म्स (Banking Reforms), इंफ्रा स्पेंडिंग (Infrastructure Spending) और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (Public Sector Undertaking) रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) पर व्यापक पॉलिसी डायरेक्शन (Policy Direction) लॉन्ग-टर्म इक्विटी फ्लोज़ (Equity Flows) के लिए सपोर्टिव बना हुआ है। FY27 के लिए लगभग 7% की अनुमानित आर्थिक विकास दर, फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) के साथ मिलकर, तत्काल कंजम्पशन बूस्ट (Consumption Boosts) के बजाय सस्टेन्ड डेवलपमेंट (Sustained Development) के लक्ष्य वाली रणनीति का सुझाव देती है।