वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026 पेश करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की ओर एक बड़ा कदम बताया है। सरकार ने सात प्रमुख सेक्टर्स पर खास ध्यान केंद्रित करते हुए भारी-भरकम 'फिस्कल' मदद का ऐलान किया है। इसका मुख्य मकसद देश के आर्थिक विकास को तेज करना, घरेलू वैल्यू एडिशन (Value Addition) को बढ़ाना और इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करके इंडस्ट्री को ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव (Competitive) बनाना है।
सात खास सेक्टर्स को बड़ा बूस्ट
फाइनेंस मिनिस्टर ने सात रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टर्स में बड़े वित्तीय आवंटन का ब्यौरा दिया।
- बायोफार्मास्युटिकल्स (Biopharmaceuticals): अगले पांच सालों के लिए ₹10,000 करोड़ का 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma SHAKTI) प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसका लक्ष्य घरेलू बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के उत्पादन से भारत को ग्लोबल हब बनाना है।
- सेमीकंडक्टर (Semiconductors): ISM 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर चिप बनाने के लिए जरूरी उपकरणों और मटेरियल के स्वदेशी उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, इंडिजिनियस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Indigenous IP) डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग (Electronics Components Manufacturing): इस स्कीम के लिए फंड को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है, ताकि मौजूदा निवेश के मोमेंटम का फायदा उठाया जा सके और एक मजबूत डोमेस्टिक इकोसिस्टम तैयार हो सके।
- रेयर अर्थ मैग्नेट्स (Rare Earth Magnets): सरकार मिनरल-समृद्ध राज्यों में माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करेगी।
- केमिकल्स (Chemicals): इंडस्ट्रियल इनपुट्स पर इंपोर्ट निर्भरता कम करने के लिए तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे।
- कैपिटल गुड्स (Capital Goods): अगले पांच सालों में ₹10,000 करोड़ के फंड से इंडस्ट्री के लिए जरूरी हाई-टेक टूल रूम्स, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट व कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को सपोर्ट मिलेगा।
- टेक्सटाइल्स (Textiles): फाइबर सेल्फ-रिलायंस, क्लस्टर मॉडर्नाइजेशन, सस्टेनेबिलिटी और स्किilling पर फोकस करने वाला एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम लाया जाएगा, जिससे लेबर-इंटेंसिव जॉब क्रिएशन बढ़ेगा।
MSME को सहारा
माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को ग्रोथ इंजन मानते हुए, एक तीन-प्रॉन्ग स्ट्रैटेजी पेश की गई है। उच्च-क्षमता वाले MSMEs को सपोर्ट करने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड बनाया जाएगा। वहीं, 2021 में स्थापित सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड (Self-Reliant India Fund) में ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप किया जाएगा, ताकि माइक्रो एंटरप्राइजेज को रिस्क कैपिटल (Risk Capital) मिलती रहे।
आर्थिक असर और भविष्य की राह
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर फिलहाल GDP में करीब 16-17% का योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 25% तक ले जाने का लक्ष्य है। यह कदम देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद करेगा, जहाँ अभी 27 मिलियन से ज्यादा लोग इस सेक्टर में काम कर रहे हैं। सरकार का केमिकल्स जैसे सेक्टरों में इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य महत्वपूर्ण है, जहाँ 2023 में इंपोर्ट $85.41 बिलियन तक पहुंच गया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत का मैन्युफैक्चरिंग GDP में योगदान चीन (लगभग 29%) और जर्मनी (लगभग 20%) जैसे देशों से कम है। इसी अंतर को पाटने के लिए यह बजट नई पहल कर रहा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0 के तहत ₹76,000 करोड़ के बाद, ISM 2.0 अब उपकरणों, मटेरियल और IP डिजाइन को मजबूत करने पर ध्यान देगा। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के 2032 तक USD 100.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
कैपिटल गुड्स सेक्टर में, सरकार ने FY26 के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ा दिया है। कैपिटल गुड्स सेक्टर का प्रोडक्शन FY15 में $27.6 बिलियन से बढ़कर FY24 में $51.7 बिलियन हो गया है। ये सभी कदम डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देंगे और इंपोर्ट पर निर्भरता घटाएंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि बजट में किए गए ये आवंटन और सेक्टर-फोक्स्ड अप्रोच, इंडस्ट्रियल सेल्फ-रिलायंस और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। सात प्रमुख सेक्टर्स में डोमेस्टिक कैपेबिलिटी बनाने और MSMEs को सपोर्ट करने से एक ज्यादा रेजिलिएंट (Resilient) और डायनामिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है।