Union Budget 2026-27 पेश हो चुका है, और सरकार का फोकस साफ है – देश की ग्रोथ को रफ्तार देना। इस बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के लिए रिकॉर्ड ₹12.22 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और इकॉनमी को आगे बढ़ाने का बड़ा संकेत है।
कैपेक्स-ड्रिवेन ग्रोथ का दम
यह आवंटन पिछले साल के मुकाबले 11.5% ज़्यादा है, जिससे पब्लिक कैपेक्स जीडीपी का 4.4% हो गया है। यह पिछले एक दशक में सबसे ज़्यादा है। इस बड़े निवेश का मकसद मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट पैदा करना है, जिससे रोज़गार बढ़े, डिमांड को सहारा मिले और धीरे-धीरे प्राइवेट सेक्टर भी निवेश के लिए आगे आए।
प्राइवेट सेक्टर में उम्मीद की किरण
हालांकि, पब्लिक स्पेंडिंग ग्रोथ का मुख्य इंजन है, लेकिन फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को प्राइवेट सेक्टर में निवेश की शुरुआत के कुछ शुरुआती संकेत मिले हैं। कंपनियां अब सिर्फ पैसिव इनकम पर फोकस न करके, नई कैपेसिटी बनाने और 'फ्रंटियर सेक्टर्स' में नए बिज़नेस शुरू करने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि प्राइवेट कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट जीडीपी का महज़ 10% के आसपास रहा है, जो कई उभरते देशों से कम है। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को पूरी तरह रफ्तार पकड़ने के लिए लगातार सुधारों और बेहतर ग्लोबल माहौल की ज़रूरत होगी।
ग्लोबल सेंटीमेंट और ग्रोथ का अंदाज़ा
वैश्विक निवेशक भारतीय इकॉनमी को लेकर आशान्वित दिख रहे हैं। खासकर नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों के पेंशन और सॉवरेन फंड्स ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। हालिया कूटनीतिक वार्ताओं का असर भारतीय शेयर बाज़ार और रुपए की रिकवरी पर भी देखा गया है। सरकार का 10% नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य भी रियलिस्टिक माना जा रहा है, जिसके साथ रियल जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड की अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव जैसी चिंताएं बनी हुई हैं। पिछले साल 2025 में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने बाज़ार से काफी पैसा निकाला था, जो इस सावधानी को दर्शाता है।
पॉलिसी में बदलाव: SGB और F&O पर STT
बजट में कुछ पॉलिसी से जुड़े अहम बदलाव भी किए गए हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGBs) पर सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए निवेश पर अब कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। इसे सट्टेबाजी कम करने और ओरिजिनल इश्यू से खरीदने को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इसके अलावा, डेरिवेटिव्स (Futures & Options) ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भी बढ़ोतरी की गई है। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है, और ऑप्शंस पर यह 0.1% से बढ़कर 0.15% हो गया है। इसका मकसद खासकर रिटेल इन्वेस्टर्स के बीच हो रही अत्यधिक सट्टेबाजी को कम करना है, जो अक्सर F&O में नुकसान उठाते हैं।
विश्लेषण और फिस्कल हेल्थ
ऐतिहासिक रूप से, सरकारी कैपेक्स ही ग्रोथ का मुख्य जरिया रहा है। लगातार हाई कैपेक्स आवंटन यह दर्शाता है कि इकॉनमी अभी भी पब्लिक स्पेंडिंग पर निर्भर है, क्योंकि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की रिकवरी अभी धीमी है। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बहुत ज़रूरी है। डेरिवेटिव्स पर STT में बढ़ोतरी से बाज़ार की लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय इन्वेस्टर्स की सुरक्षा के लिए है। SGB पर टैक्स का नया नियम सेकेंडरी मार्केट के निवेशकों के लिए गणित बदल देगा। फिस्कल हेल्थ की बात करें तो, FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 4.3% रखा गया है, जो पिछले साल के 4.4% से कम है। यह फिस्कल कंसॉलिडेशन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है। 'डेट टू जीडीपी' (Debt to GDP) फ्रेमवर्क को मुख्य आधार बनाना, लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल मैनेजमेंट का संकेत है।
आगे का रास्ता
कुल मिलाकर, यह बजट मीडियम-टर्म के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है, जिसमें सस्टेन्ड कैपेक्स और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है। घरेलू मांग और निवेश के इकॉनमी की ग्रोथ को गति देने की उम्मीद है। हालांकि, इन पहलों की सफलता इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के कुशल निष्पादन और कैपिटल को आकर्षित करने वाली लगातार सुधारों पर निर्भर करेगी।