बाज़ार में उथल-पुथल, पर सुधारों पर जोर
1 फरवरी, 2026 को पेश किए गए Union Budget 2026 का मुख्य लक्ष्य भारत की अर्थव्यवस्था को लगातार आगे बढ़ाना है। इस बजट में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (Structural Reforms) और पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) पर खास ध्यान दिया गया है। सरकार का लक्ष्य 'युवा शक्ति' और देश की घरेलू क्षमताओं का इस्तेमाल करके ग्रोथ को गति देना है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ (Nominal GDP Growth) 10% रहने का अनुमान लगाया है और फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को जीडीपी के 4.3% पर रखने का लक्ष्य रखा है।
हालांकि, इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद, बजट वाले दिन यानी 1 फरवरी, 2026 को शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 1,800 अंकों से ज़्यादा गिरा और NSE Nifty50 25,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ, जिससे पहले की बढ़त भी खत्म हो गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेरिवेटिव्स (Derivatives) पर सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने जैसे कुछ प्रस्तावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। बजट में अल्पावधि के बड़े स्टिमुलस (Stimulus) के बजाय स्थिरता और निरंतरता पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।
कैपिटल मार्केट को मजबूती और विदेशी निवेश का बूस्टर
सरकार कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट (Corporate Bond Market) और म्युनिसिपल बॉन्ड मार्केट (Municipal Bond Market) को मजबूत करने के लिए नए फ्रेमवर्क ला रही है। इसमें फंड्स और कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स (Corporate Bond Index) पर डेरिवेटिव्स (Derivatives) का एक्सेस शामिल है।
भारत में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (Foreign Portfolio Investment) को भी आसान बनाया जा रहा है। पर्सन रेजिडेंट आउटसाइड इंडिया (PROIs) और पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन (PIOs) के लिए इंडिविजुअल इन्वेस्टमेंट लिमिट (Individual Investment Limit) 5% से बढ़ाकर 10% और एग्रीगेट लिमिट (Aggregate Limit) 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है। इसके अलावा, फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (Non-debt Instruments) रूल्स (Rules) में भी बदलाव का प्रस्ताव है ताकि विदेशी निवेश की प्रक्रिया सरल हो सके। इंश्योरेंस सेक्टर (Insurance Sector) में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की सीमा 100% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो अपना पूरा प्रीमियम देश में निवेश करती हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए खास ऐलान
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलने वाला है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Electronics Components Manufacturing Scheme) के लिए आउटले (Outlay) को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, दुर्लभ पृथ्वी चुम्बकों (Rare Earth Magnets), केमिकल पार्क्स (Chemical Parks) और कैपिटल गुड्स (Capital Goods) के लिए नई स्कीम्स लाई जाएंगी, ताकि इम्पोर्ट पर निर्भरता कम हो और घरेलू सप्लाई चेन (Supply Chain) मजबूत हो।
टेक्नोलॉजी सेक्टर को टैक्स (Tax) के मामले में निश्चितता मिलेगी। 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज' (Information Technology Services) के लिए 15.5% का सेफ हार्बर मार्जिन (Safe Harbour Margin) और एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट्स (Advance Pricing Agreements) के लिए फास्ट-ट्रैक प्रोसेस (Fast-track Process) लाया जाएगा। साथ ही, जो फॉरेन क्लाउड प्रोवाइडर्स (Foreign Cloud Providers) भारतीय डेटा सेंटर्स (Data Centres) के ज़रिए अपनी सेवाएं देंगे, उन्हें 2047 तक टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) मिलेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और MSME को सहारा
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) के लिए एक बड़ा कदम है। इसमें सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (High-Speed Rail Corridors), मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी (Multi-modal Connectivity) और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) बनाया गया है। यह फंड इक्विटी (Equity), लिक्विडिटी (Liquidity) और गवर्नेंस (Governance) में मदद करेगा। इसके अलावा, MSMEs के लिए एक कॉम्प्रिहेंसिव लिक्विडिटी पैकेज (Liquidity Package) भी लाया गया है।
हेल्थकेयर और विशेष क्षेत्र
हेल्थकेयर सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। ₹10,000 करोड़ की 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma SHAKTI) योजना से देश में बायोफार्मास्युटिकल (Biopharmaceutical) इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा और पांच रीजनल मेडिकल टूरिज्म हब (Medical Tourism Hubs) बनाए जाएंगे। माइनिंग और मिनरल्स (Mining and Minerals) सेक्टर के लिए रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स स्कीम (Rare Earth Permanent Magnets Scheme) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) सेक्टर के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors) जैसे कदम उठाए गए हैं।
आगे की राह
हालांकि बजट में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन बड़े डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) और प्राइवेटाइजेशन (Privatization) लक्ष्यों का ज़िक्र नहीं है। सरकार का पूरा फोकस रिफॉर्म-आधारित (Reform-based) और एग्जीक्यूशन-संचालित (Execution-driven) ग्रोथ पर है, ताकि भारत अपनी घरेलू क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सके। निवेशकों की नज़र अब इन नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन पर होगी।