बजट 2026: विदेशी पूंजी को आकर्षित करने का मेगा प्लान
Union Budget 2026 के साथ, भारत सरकार दुनिया भर से और भारतीय मूल के लोगों से देश में निवेश लाने के लिए एक बड़ा दांव खेल रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विदेशी निवेशक थोड़ी सुस्ती दिखा रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत एक बार फिर निवेश का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बन जाए।
विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए खास टैक्स छूट
वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई बड़े पैंतरे चले हैं। इनमें सबसे अहम है डेटा सेंटर के लिए टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) को 2047 तक बढ़ाना। इससे भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा हब बन सकता है। इसके अलावा, भारत को कैपिटल गुड्स और उपकरण सप्लाई करने वाली विदेशी कंपनियों को भी 5 साल का टैक्स हॉलिडे मिलेगा। इसका मतलब है कि सरकार विदेशी मैन्युफैक्चरिंग को भारत में लाने पर जोर दे रही है।
NRI और भारत के बाहर रहने वाले अन्य व्यक्तियों (PROIs) के लिए भी नियमों को काफी आसान बनाया गया है। अब ये निवेशक भारतीय लिस्टेड कंपनियों में अपना निवेश 5% से बढ़ाकर 10% तक कर सकते हैं। वहीं, सभी PROIs के लिए कुल निवेश की सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है। इस कदम से उम्मीद है कि बाजार में FPI के लगातार बाहर जाने के बावजूद नई पूंजी आएगी। विदेशी एक्सपर्ट्स के लिए उनकी ग्लोबल इनकम पर टैक्स छूट और गैर-निवासियों के लिए मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) से छूट जैसे प्रस्ताव भी वैश्विक प्रतिभाओं और व्यवसायों को लुभाने के लिए हैं।
हालांकि, बजट वाले दिन, 1 फरवरी, 2026 को शेयर बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। Nifty50 और BSE Sensex जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी थी। इस बढ़ोतरी से ट्रेडिंग की लागत काफी बढ़ गई है। यह बाजार की छोटी अवधि की प्रतिक्रिया है, जो बजट में दिए गए लंबे समय के वित्तीय प्रोत्साहन से थोड़ी अलग है।
आर्थिक तस्वीर और भारत की पोजिशनिंग
ये टैक्स उपाय भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के बीच आए हैं, हालांकि रुपये पर थोड़ा दबाव है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, FY26 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है, और FY27 के लिए यह 6.8-7.2% के बीच रह सकती है। देश की मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और डोमेस्टिक डिमांड मजबूत है, जिसके चलते S&P ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB तक अपग्रेड किया है। लेकिन, ट्रेड डेफिसिट और पूंजी के बहिर्वाह के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से करीब 19 अरब डॉलर निकाल लिए थे।
भारत खुद को चीन पर निर्भर सप्लाई चेन के एक विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है। यह बात वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही है जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं। वियतनाम और थाईलैंड जैसे अन्य उभरते बाजार भी ऐसे ही प्रोत्साहन दे रहे हैं, लेकिन भारत का विशाल घरेलू बाजार और जारी सुधार इसे अलग बनाते हैं। खासकर डेटा सेंटर सेक्टर में बूम देखने को मिल रहा है, जिसके 2031 तक 25.07 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। क्लाउड इन्वेस्टमेंट और AI वर्कलोड इसके मुख्य चालक हैं। इसी तरह, GIFT City एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब के रूप में मजबूत हो रहा है, जहां 500 से ज्यादा वित्तीय संस्थान आ चुके हैं और यह सिंगापुर व दुबई जैसे केंद्रों को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, टैक्स इंसेंटिव्स भारत में FDI आकर्षित करने में बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं।
आगे का रास्ता: विकास की गति बनाए रखना
बजट के इन व्यापक उपायों का उद्देश्य विदेशी पूंजी और डायस्पोरा की भागीदारी को बढ़ाकर भारत की विकास गति को बनाए रखना है। टैक्स हॉलिडे को बढ़ाना, निवेश सीमाओं को आसान बनाना और GIFT City जैसे खास सेक्टरों के लिए इंसेंटिव देना, यह दर्शाता है कि सरकार एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों का मकसद न केवल STT बढ़ोतरी जैसी तत्काल बाजार की चिंताओं को दूर करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह बना रहे, जो बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को संभालने और भारत के उन्नत अर्थव्यवस्था बनने के सपने को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है। इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन्हें कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और गतिशील वैश्विक परिदृश्य में भारत के मूल आर्थिक फंडामेंटल्स कितने मजबूत बने रहते हैं।