डेरिवेटिव्स टैक्स Hike पर मार्केट की तीखी प्रतिक्रिया
बजट पेश होने के दिन, 1 फरवरी 2026 को, शेयर बाजारों ने Union Budget 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। स्पेशल ट्रेडिंग सेशन के अंत में प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट आई। बेंचमार्क Sensex लगभग 1.54% गिरकर 81,294.28 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 1.79% की गिरावट के साथ 24,965.05 पर आ गया। इस बिकवाली का मुख्य कारण फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर Securities Transaction Tax (STT) में बढ़ोतरी थी। STT फ्यूचर्स पर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% कर दिया गया। बाजार की अस्थिरता को मापने वाला Nifty VIX, ऐलान के बाद 14.32% उछलकर 15.28 पर पहुंच गया। भले ही बजट के मैक्रोइकॉनॉमिक लक्ष्य और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्चों पर ध्यान दिया गया, लेकिन डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की बढ़ी हुई लागतों ने इन सकारात्मक बातों को पीछे छोड़ दिया, जिससे कैपिटल मार्केट सेगमेंट में आक्रामक बिकवाली हुई।
राजकोषीय अनुशासन और निवेश-आधारित विकास की रणनीति
बजट मध्यम अवधि की रणनीति को मजबूत करता है, जो राजकोषीय अनुशासन (fiscal prudence) और निवेश-आधारित विकास (investment-led growth) पर केंद्रित है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (FY27) के लिए राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) GDP का 4.3% रहने का अनुमान है, जो FY26 के 4.4% के संशोधित अनुमान से बेहतर है। यह मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार का अनुमान है कि कर्ज-से-GDP अनुपात (debt-to-GDP ratio) FY27 में 55.6% तक गिर जाएगा, जो FY26 में 56.1% था। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य 2030-31 तक लगभग 50% तक पहुंचाना है। इस सुनियोजित दृष्टिकोण का उद्देश्य विकास को बढ़ावा देना और नीतिगत विश्वसनीयता को मजबूत करना है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष जोर दिया गया है, FY27 के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (public capital expenditure) रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ प्रस्तावित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11.5% से 12% की वृद्धि है। इस निरंतर निवेश का उद्देश्य आर्थिक दक्षता बढ़ाना, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना और निजी पूंजी को आकर्षित करना है। विकास को गति देने वाले सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना है।
रणनीतिक क्षेत्र और कैपिटल मार्केट को गहरा बनाना
बजट भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हाई-टेक और उभरते क्षेत्रों (sunrise sectors) को रणनीतिक प्राथमिकता देता है। इनमें सेमीकंडक्टर (semiconductors), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग (advanced manufacturing), बायोफार्मा (biopharma), दुर्लभ-पृथ्वी प्रसंस्करण (rare-earth processing) और ग्लोबल डेटा सेंटर (global data centers) शामिल हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता में तेजी लाने के लिए ₹40,000 करोड़ का बड़ा आवंटन मिला है। वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए, बजट ने कैपिटल मार्केट्स को गहरा करने और ऋण बाजार (debt market) को मजबूत करने के उपायों का प्रस्ताव दिया है। पहलों में कॉर्पोरेट बॉन्ड में मार्केट-मेकिंग (market-making) शुरू करना, लिक्विडिटी और रिस्क मैनेजमेंट टूल को बढ़ाना, और REITs व InvITs के माध्यम से अवसरों का विस्तार करना शामिल है। इसके अलावा, गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT IFSC) में यूनिट्स के लिए टैक्स हॉलिडे (tax holiday) को 20 साल तक बढ़ा दिया गया है, जिसके बाद 15% की टैक्स दर होगी, जिससे यह एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब के रूप में और अधिक आकर्षक बन गया है। लिस्टेड इक्विटी में नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) या विदेश में रहने वाले व्यक्तियों (PROI) के लिए निवेश सीमा को दोगुना करके 10% कर दिया गया है।
आगे की ओर देखती आर्थिक राह
निरंतरता और अनुशासन की विशेषता वाला यह बजट, दीर्घकालिक विकास के लिए एक पूर्वानुमेय ढांचा प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। विश्लेषकों का मानना है कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य प्राप्त करने योग्य है, जो आर्थिक गति को बनाए रखने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के बीच संतुलन दर्शाता है। खपत समर्थन पर पूंजी निर्माण पर निरंतर ध्यान लंबे समय तक उत्पादकता लाभ और रोजगार सृजन का लक्ष्य रखता है। सरकार FY27 के लिए नॉमिनल GDP ग्रोथ (nominal GDP growth) 10% रहने का अनुमान लगाती है, जो मजबूत सुधारों और मैक्रोइकॉनॉमिक नींवों पर आधारित है। रणनीतिक क्षेत्रों, विनिर्माण लचीलेपन और कैपिटल मार्केट विकास पर जोर भारत को उभरती वैश्विक आर्थिक गतिशीलता का लाभ उठाने की स्थिति में रखता है।