वैश्विक चुनौतियों के बीच राजकोषीय संतुलन (Fiscal Consolidation Amidst Global Challenges)
Union Budget 2026-27 को तैयार करते समय सरकार ने वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन डिसरप्शन (Supply Chain Disruptions) को ध्यान में रखा है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) का लक्ष्य 4.3% रखा है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अनुमानित 4.4% से कम है। इसके साथ ही, डेट-टू-जीडीपी रेशियो (Debt-to-GDP Ratio) को 56.1% से घटाकर 55.6% तक लाने का अनुमान है। ये लक्ष्य मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी (Macro-economic Stability) बनाए रखने का संकेत देते हैं, जो अनिश्चितता भरे ग्लोबल माहौल में निवेशकों के लिए बहुत ज़रूरी है। इस वित्तीय रणनीति का एक अहम हिस्सा यह भी है कि प्राथमिकता वाले सेक्टर्स में खर्च के लिए गुंजाइश बनाई जा सके।
इंफ्रा और मैन्युफैक्चरिंग: विकास के मुख्य स्तंभ (Infrastructure and Manufacturing: Pillars of Growth)
FY 2026-27 में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) के लिए भारी भरकम ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इस बढ़े हुए खर्च का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) को गति देना है। यह कदम मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और मरीन सेक्टर्स के लिए एक कैटलिस्ट (Catalyst) का काम करेगा और 'विकसित भारत 2047' (Viksit Bharat 2047) के लक्ष्य के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है। बजट में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (Domestic Manufacturing Capacity) को बढ़ाने के लिए कई पहलों का प्रस्ताव है, जिसमें कंटेनर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए सपोर्ट शामिल है। बायोफार्मा सेक्टर पर भी खास ध्यान दिया गया है। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Private Investment) को बढ़ावा देने और जोखिम कम करने के लिए एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) भी स्थापित किया जा रहा है। इकोनॉमिक अनुमानों के मुताबिक, मजबूत डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) और इन्वेस्टमेंट मोमेंटम (Investment Momentum) के चलते FY27 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ (Nominal GDP Growth) लगभग 10-10.5% रहने की उम्मीद है।
प्राइवेट सेक्टर की भूमिका और इन्वेस्टमेंट आउटलुक (Private Sector Imperative and Investment Outlook)
हालांकि पब्लिक खर्च बढ़ाया जा रहा है, पूर्व नीति आयोग (NITI Aayog) सीईओ अमिताभ कांत ने ज़ोर देकर कहा है कि 8-9% की लगातार लंबी अवधि की ग्रोथ सिर्फ सरकारी खर्च पर निर्भर नहीं रह सकती, क्योंकि सरकारी खर्च अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका है। इसलिए, भारत के भविष्य के आर्थिक नैरेटिव (Economic Narrative) के लिए प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) को महत्वपूर्ण इंजन माना जा रहा है। बजट का उद्देश्य एक ऐसा माहौल बनाना है जो इन्वेस्टमेंट (Investment) के लिए अनुकूल हो, हालांकि तत्काल खपत (Consumption) को बढ़ावा देने वाले उपायों पर ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया गया। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में बदलाव के बीच फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को आकर्षित करने पर लगातार ध्यान केंद्रित रहेगा। फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) की समीक्षा जैसे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) को सरल बनाने के प्रयासों से भी इन्वेस्टमेंट के रास्ते खोलने की उम्मीद है। छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भविष्य के चैंपियंस में बदलने में मदद करने के लिए ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) की शुरुआत की गई है, ताकि उनकी लिक्विडिटी (Liquidity) और कॉम्पिटिटिव प्रेशर (Competitive Pressure) जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके।