यह बजट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन की नाजुकता और विकसित देशों की बदलती मॉनेटरी पॉलिसी के बीच पेश किया गया है। सरकार का लक्ष्य भारत की आर्थिक रफ्तार को मजबूती देना है, साथ ही मैक्रोइकॉनोमिक स्टेबिलिटी बनाए रखना है।
राजकोषीय संतुलन पर बड़ा जोर
एक बड़ा और अहम कदम ओफ्फ-बजट बरोइंग्स (Off-Budget Borrowings - OBBs) को लेकर है। सरकार ने इन पर सख्त कैप (cap) लगाने और इन्हें ऑन-बजट (on-budget) डिस्क्लोजर के दायरे में लाने का फैसला किया है, ताकि वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई जा सके। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY26) में रेवेन्यू (revenue) में आई लगभग ₹0.8 लाख करोड़ की कमी के बावजूद, सरकार ने अपने डेफिसिट टारगेट को बनाए रखने के लिए खर्चों में तालमेल बिठाया।
FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य GDP का 4.3% रखा गया है, जो FY26 के रिवाइज्ड अनुमान 4.4% से थोड़ा बेहतर है। इससे भारत 2028-29 तक डेफिसिट को 4.0% से नीचे लाने की राह पर है। जनरल गवर्नमेंट डेट (General Government Debt) के 2030-31 तक GDP के लगभग 82% से घटकर 78% हो जाने का अनुमान है।
डेफिसिट की फाइनेंसिंग के लिए ₹17.2 लाख करोड़ की ग्रॉस मार्केट बरोइंग (Gross Market Borrowings) और ₹11.7 लाख करोड़ की नेट बरोइंग (Net Borrowings) का अनुमान है। इसके अलावा, स्मॉल सेविंग्स (small savings) और ₹75,000 करोड़ विनिवेश (disinvestment) से आएंगे।
सार्वजनिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure - Capex) ग्रोथ का एक मुख्य आधार बना रहेगा, जिसके लिए FY27 में ₹12.2 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।
भविष्य की टेक्नोलॉजीज में भारी निवेश
भविष्य के हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए, नेशनल AI मिशन (National AI Mission) के तहत कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर (compute infrastructure) और 1 करोड़ युवाओं को स्किल (skill) देने के लिए ₹10,000 करोड़ का ऐलान किया गया है।
क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing), सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) और बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) के लिए ₹5,000 करोड़ का इनोवेशन फंड (Innovation Fund) भी तैयार है। इसके साथ ही, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में टैक्स छूट बढ़ाई गई है।
ऊर्जा क्षेत्र में, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (National Critical Minerals Mission) का विस्तार किया गया है, जिससे भारत दुर्लभ खनिजों (rare minerals) के लिए आयात पर निर्भरता कम कर सके। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर (Rare Earth Corridors) स्थापित किए जाएंगे।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) के लिए ₹40,000 करोड़ का भारी आवंटन किया गया है, ताकि घरेलू चिप प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सके।
छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) भी शुरू किया जाएगा।
मंत्रालय और योजनाओं में खर्च का तालमेल
खर्चों में किए गए तालमेल के तहत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (PLI स्कीम्स), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (पोषण 2.0) जैसे प्रमुख मंत्रालयों के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure) में कटौती देखी गई।
स्पेशली, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स, प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फंड्स, भारतनेट और पोषण 2.0 जैसी योजनाओं के आवंटन में कमी की गई।
राज्यों का वित्त और बाजार की प्रतिक्रिया
यह बजट 16वें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें राज्यों को डिविजिबल पूल का 41% टैक्स ट्रांसफर जारी रहेगा। नए टैक्स ट्रांसफर फॉर्मूले में राज्यों के GDP में योगदान को 10% वेटेज दिया गया है, जो इक्विटी की जगह ग्रोथ इंसेंटिव पर जोर देता है।
शेयर बाजार (Share Market) ने बजट पर शुरुआत में थोड़ी गिरावट के साथ प्रतिक्रिया दी, खासकर ब्रोकरेज स्टॉक्स (Brokerage Stocks) में। इसका मुख्य कारण इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।
नागरिकों के लिए एक अहम खबर यह है कि 1 अप्रैल, 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) लागू होगा, जिससे टैक्सपेयर्स (taxpayers) को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।