Union Budget 2026: आम आदमी की जेब पर बड़ा असर! जानिए क्या हुआ सस्ता, क्या महंगा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Union Budget 2026: आम आदमी की जेब पर बड़ा असर! जानिए क्या हुआ सस्ता, क्या महंगा
Overview

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज पेश किए यूनियन बजट 2026 में देश भर के उपभोक्ताओं के खर्च के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। ज़रूरी दवाओं, स्मार्टफोन और विदेशी यात्रा को सस्ता किया गया है, वहीं लग्जरी इंपोर्ट, तंबाकू उत्पादों और शेयर बाजार के डेरिवेटिव्स पर टैक्स बढ़ा दिया गया है।

बजट 2026: उपभोक्ताओं के लिए बड़ा फेरबदल

यह वित्तीय समायोजन एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है, जो अनियंत्रित खपत के बजाय घरेलू उद्योगों और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है। इस कदम से घरों के बजट में बदलाव आएगा, महत्वपूर्ण इलाज और टेक्नोलॉजी अधिक सुलभ हो जाएंगी, लेकिन विवेकाधीन खर्च और सट्टेबाजी वाली बाजार गतिविधियों पर लगाम लगेगी।

स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी होंगी और सस्ती

बजट में 17 कैंसर से संबंधित दवाओं और सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को माफ कर दिया गया है। इन उपायों का उद्देश्य गंभीर बीमारी के इलाज के वित्तीय बोझ को काफी कम करना है। इसके अलावा, स्मार्टफोन कंपोनेंट्स पर टैरिफ कम होने से मोबाइल डिवाइस और सस्ते होने की उम्मीद है, जो स्थानीय असेंबली को बढ़ावा देगा और रिटेल कीमतों को कम कर सकता है। माइक्रोवेव ओवन, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी और सोलर पैनल पर भी ड्यूटी के तर्कसंगत होने से कीमतें कम होने की संभावना है।

विदेशी यात्रा और शिक्षा पर राहत

विदेशी पर्यटन पैकेज पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) को मौजूदा 5-20% की दरों से घटाकर एक समान 2% कर दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अग्रिम लागत सरल हो गई है। विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को भी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा व्यय के लिए रेमिटेंस पर TCS की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है।

लग्जरी, तंबाकू और ट्रेडिंग हुए महंगे

दूसरी ओर, बजट में लग्जरी खपत और 'सिन गुड्स' से राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इंपोर्टेड शराब और हाई-एंड घड़ियों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाएगी। सिगरेट और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पादों की कीमतें भी बढ़ेंगी, क्योंकि एक्साइज ड्यूटी और नए सेस में वृद्धि की गई है। बाजार सहभागियों को भी अधिक लागत का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में काफी वृद्धि की गई है। फ्यूचर्स पर यह 0.02% से बढ़कर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1%/0.125% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकना है।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

कुछ औद्योगिक मशीनरी पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट वापस ले ली गई है, खासकर जहां घरेलू उत्पादन क्षमता पर्याप्त मानी जाती है। इसका लक्ष्य स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, हालांकि इससे आयात पर निर्भर व्यवसायों की तत्काल लागत बढ़ सकती है। बजट ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में 'मेक इन इंडिया' को मजबूत करने के सरकार के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की है, जिसके लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहलों के लिए आउटले बढ़ाया गया है।

सेक्टरों पर असर और बाजार की प्रतिक्रिया

बजट के इस दोहरे दृष्टिकोण - जहां कुछ को राहत दी गई है और कुछ पर लेवी बढ़ाई गई है - का विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। जहां इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर को ड्यूटी समायोजन से लाभ होने की उम्मीद है, वहीं विवेकाधीन लग्जरी खर्च और सट्टेबाजी वाले ट्रेडिंग पर केंद्रित क्षेत्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। STT में बढ़ोतरी की घोषणा से शेयर बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई, सूचकांकों में तेज गिरावट आई, विशेष रूप से एक्सचेंज और ब्रोकरेज शेयरों पर इसका असर पड़ा। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.3% पर लाने का लक्ष्य रखा है, जो विकास पहलों के साथ-साथ वित्तीय समेकन पर निरंतर जोर देने का संकेत देता है। इकोनॉमिक सर्वे ने 7% GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है।

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