मैन्युफैक्चरिंग और MSME को सशक्त बनाना
यूनियन बजट 2026-27 में सात स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने के लिए काफी रिसोर्सेज रखे गए हैं, जिसका लक्ष्य ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की पोजिशन मजबूत करना है। एक अहम पहल ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड की स्थापना है, जिसे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को इक्विटी और क्वासी-इक्विटी सपोर्ट देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मकसद पारंपरिक डेट फाइनेंसिंग के बजाय स्केलेबल ग्रोथ और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट को बढ़ावा देना है। इस फंड से हजारों SMEs को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जो प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा औरproven ट्रैक रिकॉर्ड व स्केलेबिलिटी वाले बिजनेसेज को टारगेट करेगा। इसके अलावा, Biopharma SHAKTI इनिशिएटिव को अगले पांच साल में ₹10,000 करोड़ मिलेंगे, ताकि भारत को नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के लिए बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर फोकस करते हुए एक ग्लोबल बायोफार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में डेवलप किया जा सके। इसमें नई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPERs) की स्थापना और मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करना शामिल है, साथ ही 1,000 से ज्यादा अप्रूव्ड क्लिनिकल ट्रायल साइट्स बनाना भी शामिल है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सिक्योरिटी के पिलर्स
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) में काफी बढ़ोतरी हुई है, FY2026-27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का एलोकेशन प्रस्तावित है, जो FY2025-26 के ₹11.2 लाख करोड़ के मोमेंटम को जारी रखेगा। इस मजबूत पब्लिक खर्च से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति मिलने की उम्मीद है, खासकर रोड, रेलवे और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दिया जाएगा। बजट लॉन्ग-टर्म एनर्जी सिक्योरिटी और स्पेशलाइज्ड सिटी इकोनॉमिक रीजन्स (City Economic Regions) को डेवलप करने को भी प्राथमिकता दे रहा है, ताकि लोकल ग्रोथ को बढ़ावा मिल सके। एनर्जी सिक्योरिटी को एड्रेस करने के लिए, कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) टेक्नोलॉजीज के लिए अगले पांच साल में ₹20,000 करोड़ का एलोकेशन रखा गया है, जो पावर, स्टील, सीमेंट और केमिकल्स जैसे की इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) एफर्ट्स को सपोर्ट करेगा। इसके अलावा, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) की मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (Basic Customs Duty) में छूट शामिल है, जिसका मकसद लागत कम करना और एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की वायबिलिटी (viability) को बढ़ाना है।
ग्लोबल इकोनॉमिक हेडविंड्स से निपटना
यह बजट चुनौतीपूर्ण ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशंस, जिनमें ट्रेड डिसरप्शन (trade disruptions) और सप्लाई चेन प्रेशर (supply chain pressures) शामिल हैं, के बैकड्रॉप में तैयार किया गया है। भारत का लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रा पुश का फायदा उठाकर ग्लोबल सप्लाई चेन में एक अधिक रेसिलिएंट (resilient) पिलर बनना है। स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स में डोमेस्टिक प्रोडक्शन पर फोकस और MSMEs को मजबूत करना, एक्सटर्नल शॉक्स (external shocks) से जुड़े रिस्क को कम करने के इरादे से किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, जिसमें ₹40,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Electronics Components Manufacturing Scheme) शामिल है, इन क्रिटिकल एरियाज में भारत की पोजिशन को मजबूत करने का प्रयास है। हालांकि, लगातार लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (logistics costs), इंफ्रास्ट्रक्चर गैप्स और रेगुलेटरी इनकंसिस्टेंसी (regulatory inconsistencies) भारत की ब्रॉडर सप्लाई चेन एंबीशन्स (supply chain ambitions) के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वेस्ट एशिया जैसे जियोपॉलिटिकल क्राइसिस (geopolitical crises) ऑटोमोटिव, एग्रीकल्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में सप्लाई चेन डिसरप्शन्स को बढ़ा रहे हैं, जिससे शिपिंग टाइमलाइन और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ रही है। इन ग्लोबल प्रेशर के बावजूद, भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के रेसिलिएंट बने रहने की उम्मीद है, जिसमें 2026 में GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है।
