राष्ट्रीय सुरक्षा को नई उड़ान
भारत सरकार के Union Budget 2026-27 में इस बार राष्ट्रीय सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। बजट में प्रमुख खुफिया और गृह मंत्रालय की एजेंसियों के लिए आवंटन (allocation) में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा देखा गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में खुफिया सूचनाओं से कई बड़े ऑपरेशन्स सफल रहे हैं और अब सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की पूरी तैयारी है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का बढ़ता कद
खुफिया एजेंसी Intelligence Bureau (IB) के लिए फंडिग में 63% का भारी उछाल आया है, जो इस फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹6,782.43 करोड़ तक पहुँच गया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टीमेट ₹4,159.11 करोड़ से काफी ज़्यादा है। खास बात यह है कि यह बजट एस्टीमेट 2025-26 की तुलना में 74% की छलांग है। यह बढ़ोतरी देश के अंदरूनी सुरक्षा ऑपरेशन्स, जैसे 'ऑपरेशन सिंदूर' और माओवादी नेताओं के खात्मे में IB की भूमिका को दर्शाती है। इस बजट का एक अहम हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) में हुआ आठ गुना से ज़्यादा का इजाफा है, जो ₹257 करोड़ से बढ़कर ₹2,549.54 करोड़ हो गया है। इससे एजेंसी को एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स और साइबर इंटेलिजेंस कैपेबिलिटीज में निवेश करने में मदद मिलेगी, ताकि बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सके।
मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (MHA) का बड़ा आवंटन
कुल मिलाकर Ministry of Home Affairs (MHA) के बजट में 9.44% का इजाफा हुआ है, जो 2026-27 के लिए ₹2.55 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। इसमें से ₹1.73 लाख करोड़ पुलिसिंग फंक्शन्स के लिए रखे गए हैं। इस बड़े आवंटन से CRPF, BSF और ITBP जैसी पैरामिलिट्री फोर्सेज को सपोर्ट मिलेगा। सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट के लिए ₹5,577 करोड़ का फंड तय किया गया है। इसका मकसद संवेदनशील सीमाओं, जैसे भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर चेक-पोस्ट, ऑब्जर्वेशन टावर्स और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम को और मज़बूत करना है।
न्याय और सीमाओं का तकनीकी उन्नयन
यह बजट सुरक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में टेक्नोलॉजिकल मॉडर्नाइजेशन पर भी ज़ोर देता है। एयरपोर्ट इमिग्रेशन सिस्टम, जो IB के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन द्वारा मैनेज किए जाते हैं, को स्मार्ट टेक्नोलॉजी और बायोमेट्रिक्स का उपयोग करके अपग्रेड किया जाएगा, ताकि इंसानी दखल कम हो। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के लिए भी फंड बढ़ा है, जो पुलिस, कोर्ट, प्रॉसिक्यूशन और फॉरेंसिक एजेंसियों के बीच एक सीमलेस डेटा-शेयरिंग नेटवर्क बनाने में मदद करेगा। इसके लिए बजट ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹550 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, सेंसस 2027 की तैयारी के लिए भी लगभग ₹6,000 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के बीच होगा। वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के दूसरे चरण के लिए ₹300 करोड़ रखे गए हैं, जिसका फोकस सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर है।
आगे की राह: सुरक्षा में निरंतर निवेश
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्च में यह लगातार बढ़ोतरी भारत के डिफेंस और सिक्योरिटी सेक्टर में बढ़ते निवेश के बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। डिफेंस बजट में भी 15% का इजाफ़ा होकर यह ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल साइबरसिक्योरिटी और बॉर्डर सर्विलांस जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के कामों में बढ़ेगा। कैपिटल एक्सपेंडिचर पर यह ज़ोर, भविष्य में भारत की डिफेंस और इंटेलिजेंस कैपेबिलिटीज को टेक्नोलॉजिकली सुपीरियर बनाने और जटिल सुरक्षा खतरों का सामना करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।