क्यों हुआ इतना बड़ा इजाफा?
यह भारी-भरकम बढ़ोतरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी (Counter-Terrorism) व आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) ऑपरेशन्स में अहम भूमिका को देखते हुए की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, IB की खुफिया जानकारी 'ऑपरेशन सिंदूर' और पिछले साल कुछ बड़े माओवादी नेताओं के खात्मे जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में काफी कारगर साबित हुई। इसी के चलते सरकार ने IB के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) यानी पूंजीगत व्यय को भी आठ गुना से अधिक बढ़ाकर ₹2,549.54 करोड़ कर दिया है। इससे साफ है कि अब IB को एडवांस सर्विलांस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस जुटाने वाली नई तकनीकों में बड़ा निवेश करने का मौका मिलेगा।
सिर्फ IB ही नहीं, सुरक्षा का पूरा खाका
सिर्फ IB का फंड ही नहीं बढ़ा है, बल्कि गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs - MHA) का कुल बजट भी 9.4% बढ़कर ₹2.55 लाख करोड़ हो गया है। यह दिखाता है कि सरकार एक बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी में है।
- सीमाओं की सुरक्षा: संवेदनशील सीमाओं पर सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए ₹5,577 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- इमिग्रेशन सिस्टम: एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन सिस्टम को मॉडर्न बनाने और यात्रियों की चेकिंग को तेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी और बायोमेट्रिक्स पर जोर दिया जाएगा।
- क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम: पुलिस, कोर्ट, अभियोजन (Prosecution) और फोरेंसिक एजेंसियों के बीच डेटा के आसान आदान-प्रदान के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) को भी बड़ा बूस्ट मिला है। इसका बजट ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹550 करोड़ कर दिया गया है।
यह सारे कदम कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के सरकारी इरादे को दर्शाते हैं।
भविष्य की रणनीति: सुरक्षा में लगातार निवेश
यह बजट भारत के रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में हो रहे लगातार बड़े निवेश का ही हिस्सा है। रक्षा बजट (Defence Budget) में भी 15% की बढ़ोतरी कर इसे ₹7.85 लाख करोड़ तक पहुंचाया गया है। अनुमान है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और सीमा निगरानी जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश करेगी। यह भविष्य में आने वाले आंतरिक और बाहरी खतरों से निपटने के लिए सरकार की दूरगामी सोच को दिखाता है। IB और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर में हुई यह बढ़ोतरी, देश की सुरक्षा क्षमताओं को लंबे समय तक आधुनिक बनाए रखने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।