विदेशी निवेशकों की निकासी को रोकने का दांव
पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाज़ार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार पैसा निकाला जा रहा था। साल 2025 में तो रिकॉर्ड तोड़ निकासी हुई और 2026 की शुरुआत में भी यह सिलसिला जारी रहा। डॉलर की मजबूती, विदेशी बाज़ारों की तुलना में कम आफ्टर-टैक्स रिटर्न और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसे कारणों से विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ार से दूर जा रहे थे। इस स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
निवेश सीमा में भारी बढ़ोतरी
बजट 2026 के भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के नियमों में अहम बदलावों की घोषणा की। इसके तहत, अब एक विदेशी निवेशक किसी लिस्टेड कंपनी की कुल पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 10% तक निवेश कर सकेगा। पहले यह सीमा 5% थी। वहीं, सभी विदेशी निवेशकों को मिलाकर कुल विदेशी हिस्सेदारी की सीमा को 10% से बढ़ाकर 24% कर दिया गया है। इन बढ़ाई गई सीमाओं से ज़्यादा बड़े और स्थिर निवेश आने की उम्मीद है। बजट में विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी सीधे भारतीय शेयरों में निवेश की इजाजत दी गई है।
बाज़ार और अर्थव्यवस्था के लिए नई उम्मीदें
इस कदम का मुख्य मकसद भारतीय पूंजी बाज़ारों को और गहरा करना, बेहतर प्राइस डिस्कवरी को बढ़ावा देना और कंपनियों के लिए स्थिर, लंबी अवधि का पैसा आकर्षित करना है। विदेशी निवेश बढ़ने से बाज़ार में लिक्विडिटी (liquidity) बढ़ेगी और शेयरों की कीमतों में अचानक आने वाली बड़ी गिरावट या उछाल को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए ₹5,000 करोड़ का ऐलान किया गया है। साथ ही, नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों की समीक्षा का भी प्रस्ताव है, ताकि विदेशी निवेश को और आसान बनाया जा सके।