भारतीय बॉन्ड मार्केट में भूचाल! फ्यूल टैक्स कटौती और महंगे तेल का दोहरा झटका, यील्ड्स रिकॉर्ड स्तर पर

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय बॉन्ड मार्केट में भूचाल! फ्यूल टैक्स कटौती और महंगे तेल का दोहरा झटका, यील्ड्स रिकॉर्ड स्तर पर
Overview

सरकारी बॉन्ड मार्केट में आज भारी गिरावट देखी गई। देश के बेंचमार्क 10-साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड (Yield) **जुलाई 2024** के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) घटाने का फैसला है। इस कदम ने देश के फिस्कल आउटलुक (Fiscal Outlook) पर चिंता बढ़ा दी है।

ईंधन टैक्स कटौती से बॉन्ड यील्ड्स में उछाल

इस फैसले के कारण 6.48% वाले 2035 के सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल आया और यह 27 मार्च 2026 को 6.9523% के स्तर पर पहुंच गया, जो कि जुलाई 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस कदम से सरकार को फाइनेंशियल ईयर 2027 में ₹1.5 ट्रिलियन से ₹1.6 ट्रिलियन का नुकसान हो सकता है। वहीं, वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) $105 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है और $107-$122 प्रति बैरल की रेंज तक जाने की आशंका है।

महंगाई लक्ष्य और कर्ज का दबाव

भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, ऐसे में ऊंचे तेल दाम वर्तमान खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ाने और महंगाई को तेज करने का दोहरा खतरा पैदा करते हैं। सरकार ने अगले पांच सालों के लिए 4% के महंगाई लक्ष्य (Inflation Target) को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन यह लक्ष्य अब मुश्किल नजर आ रहा है। फिच सॉल्यूशंस (Fitch Solutions) के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) 5.1% तक पहुंच सकती है, जबकि गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.2% कर दिया है। दूसरी ओर, बॉन्ड मार्केट पर भारी कर्ज का दबाव भी है। आज भारतीय राज्य ₹42,490 करोड़ जुटा रहे हैं, जो इस फाइनेंशियल ईयर में जारी ₹12.31 ट्रिलियन से अधिक है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए सरकारी उधारी ₹30.5 ट्रिलियन रहने का अनुमान है।

फिस्कल कॉम्प्रोमाइज और आर्थिक जोखिम

फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती सरकार की ओर से एक बड़ा फिस्कल कॉम्प्रोमाइज (Fiscal Compromise) है। इससे घाटा बढ़ेगा और फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए 4.3% के टारगेट को पार करने का खतरा है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) जैसी रेटिंग एजेंसियों ने इन ऊंची ऊर्जा लागतों के कारण महंगाई के अनुमानों पर जोखिम जताया है। इससे सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के कारण आर्थिक ग्रोथ धीमी पड़ने की भी आशंका है।

भारतीय बॉन्ड का आउटलुक

विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई (RBI) की लिक्विडिटी ऑपरेशन्स (Liquidity Operations) और घरेलू संस्थानों की मांग पर निर्भर करते हुए, फाइनेंशियल ईयर 2027 में 10-साल के बॉन्ड यील्ड 6.5% और 7.0% के बीच रह सकते हैं।

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