बाजार में दिखी दोहरी चाल: बॉन्ड में राहत, रुपया पस्त
भारतीय वित्तीय बाजारों में सोमवार को एक मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई। एक ओर जहां मध्य पूर्व में संभावित सीजफायर (ceasefire) की खबरों से सरकारी बॉन्ड यील्ड (bond yield) में नरमी आई, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर भारी दबाव बनाया, जिससे यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया। फॉरवर्ड प्रीमियम में आई तेज उछाल ने हेजिंग की बढ़ती मांग और RBI की संभावित नीतिगत भिन्नता की ओर इशारा किया।
सीजफायर की उम्मीदों का बॉन्ड पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते की खबरों ने बाजार में उम्मीद जगाई, जिससे 10-वर्षीय भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड घटकर 7.04% पर आ गई, जो शुक्रवार को 7.13% पर बंद हुई थी। कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई, ब्रेंट क्रूड $107 प्रति बैरल तक गिर गया, जो पहले $108 पर था। डॉलर इंडेक्स भी 100 के नीचे फिसल गया।
रुपया टूटा, भू-राजनीतिक जोखिम हावी
हालांकि, बॉन्ड बाजार की यह राहत आंशिक साबित हुई। इसके समानांतर, भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता रहा और कई रिकॉर्ड निचले स्तरों को पार करते हुए 93, 94 और यहाँ तक कि 95 रुपये प्रति डॉलर को भी छू गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब हाल ही में नियामक कार्रवाई के चलते रुपये में 1.9% का उछाल देखा गया था, जो दर्शाता है कि मूलभूत दबाव फिर से लौट आया है।
फॉरवर्ड प्रीमियम में उछाल और RBI पर दबाव
मुद्रा व्यापारियों (currency traders) ने 1-महीने के USD/INR फॉरवर्ड प्रीमियम में 5.4% से बढ़कर 6.08% तक की तेज उछाल दर्ज की। यह बढ़ी हुई हेजिंग मांग को दर्शाता है और इस बात का संकेत देता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भविष्य में कम सहायक रुख अपना सकता है। यह प्रीमियम वृद्धि, लिक्विडिटी (liquidity) संबंधी चिंताओं और अपेक्षित नीतिगत बदलावों के कारण है, जो इस आम राय के विपरीत है कि RBI अपनी ब्याज दरों को 5.25% पर अपरिवर्तित रखेगा।
FY27 के लिए घटाई गईं आर्थिक अनुमान
आर्थिक मोर्चे पर, फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए GDP अनुमानों में भारी कटौती की गई है। Standard Chartered ने FY27 GDP का अनुमान घटाकर 6.4% कर दिया है, जबकि Moody's ने भू-राजनीतिक जोखिमों और उच्च ऊर्जा कीमतों का हवाला देते हुए अपने अनुमान को 6.8% से घटाकर 6.0% कर दिया है। EY, ICRA और OECD जैसी अन्य एजेंसियों ने भी विकास की उम्मीदों को कम किया है। Crisil ने FY27 में महंगाई दर 4.3% तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें $75-80 प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो मौजूदा स्तरों से काफी कम है। IMF ने FY27 के लिए भारत की महंगाई दर 4.0% रहने का अनुमान जताया है।
ऊर्जा निर्भरता और FPI आउटफ्लो का असर
इन संशोधित अनुमानों से जारी महंगाई के दबाव का पता चलता है, जो मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 45-50% की बढ़ोतरी (जो $107-109 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी) से और बढ़ गया है। भारत आयातित ऊर्जा पर बहुत अधिक निर्भर है, जिससे $100 प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें देश के चालू खाता घाटे (current account deficit) पर दबाव डालती हैं। यह स्थिति बड़े पैमाने पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के बहिर्वाह (outflows) से और बिगड़ जाती है। मार्च में निवेशकों ने ₹56,883 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे, जो 17 महीनों में सबसे अधिक है, क्योंकि वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (emerging markets) से सावधान हो रहे हैं और सुरक्षित संपत्ति जैसे अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
RBI का हस्तक्षेप और आगे की राह
रुपये की गिरावट को रोकने के लिए RBI ने अपने भंडार से डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में काफी कमी आई है। फॉरवर्ड प्रीमियम में उछाल बाजार की चिंता को दर्शाता है, क्योंकि व्यापारी संभावित लिक्विडिटी मुद्दों को ध्यान में रख रहे हैं और यह अनुमान लगा रहे हैं कि RBI को कम सहायक नीति अपनानी पड़ सकती है, या यदि ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो दरें बढ़ानी भी पड़ सकती हैं। भारत के क्षेत्रीय साथियों की तुलना में उच्च बॉन्ड यील्ड भी दर्शाती है कि निवेशक जोखिम के लिए अधिक प्रीमियम की मांग कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में, RBI की MPC (Monetary Policy Committee) की बुधवार को होने वाली नीतिगत बैठक और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रहेगी। हालांकि सीजफायर की खबरों से बाजार की धारणा बदल सकती है, लेकिन रुपये पर लगातार बना दबाव, बढ़ते फॉरवर्ड प्रीमियम और FY27 के लिए घटाए गए आर्थिक अनुमान यह बताते हैं कि महंगाई का दबाव और आर्थिक अनिश्चितता जारी रहने की संभावना है।