भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक पार्टनर बन गया है। साल 2025 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) करीब **$6 अरब** तक पहुंच गया है। यह मजबूत रिश्ता अर्जेंटीना की खाद्य तेलों (Edible Oils) के प्रमुख सप्लायर के तौर पर भूमिका पर केंद्रित है, और भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) और एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) में विस्तार की योजना है। यह साझेदारी भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विविधीकरण (Economic Diversification) और खाद्य सुरक्षा (Food Security) के लक्ष्य के अनुरूप है।
व्यापार में आई बड़ी तेज़ी
अर्जेंटीना के भारत में राजदूत मारियानो कौकिनो (Mariano Caucino) ने 17वें एग्रीकल्चर लीडरशिप समिट (Agriculture Leadership Summit) में इस बात की पुष्टि की। उनके अनुसार, भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार (Economic Partner) है। फिलहाल, भारत के साथ अर्जेंटीना का व्यापारिक वॉल्यूम अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, ब्राजील और चिली से ही पीछे है।
आर्थिक तालमेल और खाद्य तेल का महत्व
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) लगभग $6 अरब तक पहुंच गया है। अर्जेंटीना के राजदूत के मुताबिक, यह ग्रोथ दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आपसी तालमेल का नतीजा है। भारतीय निवेशकों के लिए सबसे खास बात यह है कि अर्जेंटीना अब खाद्य तेलों (Edible Oils) का एक प्रमुख सप्लायर बन गया है। भारत अपनी फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने पर लगातार ध्यान दे रहा है, ऐसे में दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से उच्च-गुणवत्ता वाले कृषि आयात पर निर्भरता अब आम बात हो गई है।
कृषि से आगे बढ़कर अन्य सेक्टरों पर फोकस
जहां कृषि व्यापार (Agricultural Trade) इस साझेदारी का मुख्य आधार है, वहीं दोनों देश अपने सहयोग को अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ा रहे हैं। द्विपक्षीय संबंधों को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (Strategic Partnership) का दर्जा मिलने से अर्जेंटीना के विशाल क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) और एनर्जी (Energy) संसाधनों को भारतीय सप्लाई चेन में एकीकृत करने के प्रयास तेज हो गए हैं। भारतीय उद्योगों के लिए, जो आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं, अर्जेंटीना से सोर्सिंग के विकल्प उनकी सप्लाई में आने वाली अस्थिरता को कम कर सकते हैं।
अर्जेंटीना की मजबूत उपस्थिति
इस बढ़ते आर्थिक संबंधों को सुविधाजनक बनाने के लिए, अर्जेंटीना ने भारत में अपनी राजनयिक और वाणिज्यिक उपस्थिति बढ़ाई है। मुंबई में महावाणिज्य दूतावास (Consulate General) खोलने और कृषि अताशे कार्यालय (Office of the Agricultural Attache) की स्थापना जैसे कदम व्यापार लॉजिस्टिक्स को सुचारू बनाने के स्पष्ट संकेत हैं। खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), रिटेल (Retail) और ऊर्जा (Energy) क्षेत्र की कंपनियों के लिए, ये संस्थागत बदलाव सीमा पार व्यापार की बाधाओं को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
यह साझेदारी अब किस दिशा में बढ़ती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। निवेशक क्रिटिकल मिनरल्स और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में प्रगति पर नजर रख सकते हैं। इन उच्च-मूल्य वाले सेगमेंट में सफलता यह तय करेगी कि यह रिश्ता केवल कृषि पर आधारित न रहकर भारतीय उद्योगों के लिए दीर्घकालिक मूल्य कैसे बना सकता है।
