भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर! वित्तीय वर्ष 2027 तक देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) **$25-30 अरब (लगभग ₹2.5 लाख करोड़)** के सरप्लस में रहने का अनुमान है। यह सुधार कच्चे तेल की गिरती कीमतों और मजबूत सर्विसेज एक्सपोर्ट्स की वजह से होगा।
दो साल की गिरावट के बाद वापसी
केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) के ताजा अनुमानों के मुताबिक, भारत वित्तीय वर्ष 2027 तक $25-30 अरब के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स सरप्लस में आ सकता है। यह लगातार दो साल की गिरावट के बाद एक बड़ी वापसी होगी। इस सुधार का मुख्य कारण करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) का कम होना है, जो अब जीडीपी (GDP) के 0.8% से 1.2% के बीच रहने की उम्मीद है।
बाहरी मोर्चे पर सुधार के कारण
करंट अकाउंट में यह सुधार मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से जुड़ा है। अनुमान है कि इस साल तेल की औसत कीमत $80 से $85 प्रति बैरल के बीच रहेगी। इसके अलावा, भारत का सर्विसेज सेक्टर (Services Sector) भी मजबूती बनाए हुए है। वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सर्विसेज एक्सपोर्ट्स 6.1% की दर से बढ़े हैं, जो पिछले साल के मजबूत प्रदर्शन के बाद आया है। साथ ही, रेमिटेंस इनफ्लो (Remittance Inflows) भी $155 अरब तक बढ़कर एक अहम सहारा बना हुआ है। ये सभी फैक्टर मिलकर विदेशी मुद्रा के नेट आउटफ्लो (Net Outflow) को कम कर रहे हैं।
कैपिटल इनफ्लो की उम्मीदें
केयरएज का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2027 में कैपिटल अकाउंट सरप्लस (Capital Account Surplus) बढ़कर करीब $73 अरब हो सकता है, जो पिछले साल के $2 अरब के अनुमान से काफी ज्यादा है। नेट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के $15 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है, जो FY26 के $6.9 अरब से ज्यादा है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई पॉलिसी, जैसे डिपॉजिट और कमर्शियल बॉरोइंग के लिए विभिन्न स्वैप विंडो, से इस साल $45-60 अरब तक का कैपिटल इनफ्लो आकर्षित होने की संभावना है।
रुपये पर असर और जोखिम
हालांकि, मजबूत बाहरी स्थिति भारतीय रुपये (Indian Rupee) के पक्ष में है, लेकिन इसकी तेज मजबूती सीमित रह सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बड़ा फॉरवर्ड फॉरेन एक्सचेंज बुक (Forward Foreign Exchange Book) तैयार कर रखा है, जो मई 2026 के अंत तक $107 अरब तक पहुंच गया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI करेंसी की स्थिरता बनाए रखने के लिए इस बुक के कुछ हिस्से को बेच सकता है।
निवेशकों को पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये एक प्रमुख जोखिम कारक बने हुए हैं। ऐसे किसी भी घटनाक्रम से वैश्विक तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है या करेंसी मार्केट में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकता है। वित्तीय वर्ष 2027 के लिए USD/INR एक्सचेंज रेट का औसत 93 और 94 के बीच रहने का अनुमान है, जिस पर नजर बनाए रखनी होगी।
