आगामी असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग्स में **8-10%** की बढ़ोतरी का अनुमान है। बेहतर डेटा रिपोर्टिंग और नियमों के सख्त होने से अनुपालन (compliance) बढ़ा है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर बाजार और बिजनेस में कमाई के चलते अब ज्यादा लोग मुश्किल ITR फॉर्म भरेंगे।
क्यों बढ़ रही हैं टैक्स फाइलिंग्स?
भारत में असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग्स में 8-10% का इजाफा होने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी देश भर में टैक्स अनुपालन (tax compliance) के बढ़ते चलन को जारी रखेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, AY 2022-23 में कुल फाइलिंग्स 5.83 करोड़ थी, जो AY 2024-25 में बढ़कर 7.29 करोड़ हो गई। AY 2025-26 की समय सीमा सितंबर 2025 तक 7.3 करोड़ से अधिक हो चुकी थी।
इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) के ज़रिए अपनी डेटा विजिबिलिटी को बढ़ाया है, जो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करता है। टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) के सख्त नियम भी यह सुनिश्चित करते हैं कि अधिक वित्तीय गतिविधियां टैक्स सिस्टम के दायरे में आएं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि नागरिकों में डिपार्टमेंट की वित्तीय डेटा तक पहुंच के बारे में बढ़ी जागरूकता ने स्वेच्छा से फाइलिंग को प्रोत्साहित किया है, भले ही उनकी आय मानक छूट सीमा से कम हो, लेकिन वे हाई-वैल्यू वाले लेनदेन में भाग लेते हैं।
जटिल टैक्स रिटर्न्स की ओर झुकाव
फाइलिंग्स की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी देखा जा रहा है कि किस तरह के फॉर्म भरे जा रहे हैं। कई टैक्सपेयर्स जो पहले सरल ITR-1 फॉर्म का उपयोग करते थे, अब ITR-2 और ITR-3 की ओर बढ़ रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य कारण आय के पैटर्न में आया बदलाव है। जैसे-जैसे अधिक भारतीय अपनी बचत को शेयर, म्यूचुअल फंड, और फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश कर रहे हैं, उनके टैक्स रिटर्न अधिक जटिल हो रहे हैं। इसके अलावा, छोटे साइड बिजनेस और साइड-हसल के बढ़ने से ऐसे व्यक्तियों का आधार बढ़ गया है जिनकी आय का मुख्य स्रोत वेतन के अलावा कई अन्य स्त्रोत हैं।
टैक्स अनुपालन और समय-सीमा
हालांकि सरकार ने नए टैक्स रिजीम के तहत टैक्स राहतें पेश की हैं, जो अधिक स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित कर सकती हैं, टैक्सपेयर्स पर प्रशासनिक बोझ भी बढ़ रहा है। चालू असेसमेंट ईयर के लिए, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की समय सीमा 31 जुलाई है, जबकि ITR-3 और ITR-4 फाइल करने वालों को 31 अगस्त तक अपना सबमिशन पूरा करना होगा। इनकम टैक्स पोर्टल की स्थिरता और टैक्स रिफंड की गति मुख्य कारक बने रहेंगे जिन पर निवेशक और व्यक्ति इन समय-सीमाओं के नज़दीक पहुंचने पर नज़र रखेंगे। फरवरी 2026 की शुरुआत तक, पिछले वर्ष के लिए कुल फाइलिंग्स लगभग 8.80 करोड़ तक पहुंच गई थी, जो चालू चक्र के लिए एक उच्च बेंचमार्क स्थापित कर रही है।
