आयकर विभाग (Income Tax Department) नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 'टोटल टीडीएस' (Total TDS) के SMS अलर्ट भेज रहा है। इसका मकसद 31 जुलाई की ITR फाइलिंग डेडलाइन से पहले टैक्सपेयर्स को तैयार करना और किसी भी गड़बड़ी को जल्दी पकड़ना है। अपने फॉर्म 26AS से इन डिटेल्स का मिलान करना बेहद जरूरी है।
जैसे-जैसे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की 31 जुलाई की डेडलाइन नजदीक आ रही है, आयकर विभाग (Income Tax Department) ने एक अहम पहल शुरू की है। विभाग टैक्सपेयर्स को नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उनके 'क्युमुलेटिव टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स' (TDS) की जानकारी SMS अलर्ट के जरिए भेज रहा है। यह अलर्ट किसी टैक्स नोटिस की तरह नहीं, बल्कि एक सूचनात्मक रिमाइंडर है, जिसका मुख्य उद्देश्य फाइलिंग प्रोसेस को आसान बनाना और किसी भी डेटा मिसमैच को जल्दी पकड़ना है।
अपने TDS डेटा को कैसे वेरिफाई करें?
आम तौर पर, इन SMS में नियोक्ता (employer) द्वारा मार्च तिमाही तक काटा गया कुल TDS और पूरे वित्तीय वर्ष का क्युमुलेटिव TDS बताया जाता है। टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे इन SMS में दी गई जानकारी को इनकम टैक्स पोर्टल पर उपलब्ध अपने फॉर्म 26AS (Form 26AS) और एनुअल टैक्स स्टेटमेंट (ATS) से मिलाएं। अगर SMS की संख्या आपके रिकॉर्ड या फॉर्म 16 (Form 16) से मेल नहीं खाती है, तो यह एक मिसमैच का संकेत है जिसे फाइनल रिटर्न जमा करने से पहले ठीक करना होगा।
मिसमैच क्यों महत्वपूर्ण है?
जब आप ITR फाइल करते हैं, तो आपके नियोक्ता द्वारा काटा गया TDS आपकी कुल टैक्स देनदारी के मुकाबले क्रेडिट के रूप में क्लेम किया जाता है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज TDS और आपके द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों में कोई भी गड़बड़ी कई दिक्कतें पैदा कर सकती है। इनमें गलत टैक्स कैलकुलेशन, क्लेम का रिजेक्शन, टैक्स रिफंड में देरी या फिर टैक्स अथॉरिटीज से पूछताछ शामिल है। इन अलर्ट्स की समीक्षा करके, टैक्सपेयर्स यह पता लगा सकते हैं कि क्या नियोक्ता ने टैक्स जमा करने में देरी की या गलत राशि बताई, जिससे जरूरी सुधार किए जा सकें।
टैक्स फाइलिंग पर असर
विभाग का यह SMS के माध्यम से संवाद करने का कदम इनकम टैक्स पोर्टल पर पड़ने वाले लोड को मैनेज करने की एक रणनीतिक कोशिश भी है। टैक्सपेयर्स को अपने डेटा का मिलान करने और जल्दी ITR फाइल करने के लिए प्रोत्साहित करके, अधिकारी जुलाई के अंतिम दिनों में ट्रैफिक की पारंपरिक भीड़ को कम करने की उम्मीद कर रहे हैं। पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक अक्सर तकनीकी सुस्ती और जल्दबाजी में डॉक्यूमेंट सबमिट करने वाले यूजर्स के लिए त्रुटियों के बढ़ते जोखिम का कारण बनता है। यह पहल रंग लाती दिख रही है, क्योंकि हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि डेडलाइन नजदीक आते ही दैनिक फाइलिंग में लगातार वृद्धि हो रही है।
टैक्सपेयर्स के लिए अगला कदम
निवेशकों और सैलरीड व्यक्तियों को इनकम टैक्स वेबसाइट पर अपने अकाउंट में लॉग इन करके अपना लेटेस्ट फॉर्म 26AS और एनुअल टैक्स स्टेटमेंट डाउनलोड करना चाहिए। TDS के अलावा, यह सुनिश्चित करें कि बैंक ब्याज, डिविडेंड और स्टॉक मार्केट निवेश से होने वाले कैपिटल गेन जैसे अन्य आय स्रोत भी सही ढंग से दर्ज हों। सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स - जैसे फॉर्म 16, ब्याज प्रमाण पत्र और निवेश प्रूफ - को व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण है। जो लोग 31 जुलाई की डेडलाइन तक फाइल नहीं कर पाते हैं, उनके लिए यह याद रखना जरूरी है कि देरी से फाइलिंग करने पर लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज शुल्क लग सकता है, जो टैक्सपेयर की कैटेगरी पर निर्भर करेगा।
