आयकर विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, 2022-2024 के लिए एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में विदेशी संपत्तियों के डेटा को शामिल कर लिया है। इस अपडेट से टैक्स पारदर्शिता बढ़ेगी और विभाग को विदेशी होल्डिंग्स और घोषित आय के बीच किसी भी विसंगति को पहचानने में आसानी होगी।
आयकर विभाग ने अपने एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को अपडेट कर दिया है, जिसमें अब टैक्सपेयर्स की विदेशी संपत्तियों का पूरा ब्योरा शामिल होगा। यह नई सुविधा कैलेंडर वर्ष 2022 और 2023 के डेटा को कवर करती है, साथ ही 2024 के लिए भी जानकारी जोड़ी जा रही है। यह डेटा अंतरराष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से प्राप्त किया गया है, जिससे कर अधिकारी सीधे विदेशी वित्तीय होल्डिंग्स को देख सकते हैं।
यह अपडेट ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (Automatic Exchange of Information) फ्रेमवर्क में भारत की भागीदारी का हिस्सा है। यह वैश्विक व्यवस्था भाग लेने वाले देशों को कर चोरी को रोकने और यह सुनिश्चित करने की अनुमति देती है कि दूसरे देश में अर्जित आय की ठीक से रिपोर्ट की जाए और उस पर टैक्स लगे।
टैक्स अनुपालन और रिपोर्टिंग पर असर
व्यक्तिगत निवेशकों के लिए, इस डेटा का सीधा एकीकरण का मतलब है कि कर अधिकारियों के पास उनकी वैश्विक वित्तीय फुटप्रिंट का अधिक व्यापक दृष्टिकोण है। पहले, विदेशी संपत्तियों की रिपोर्टिंग काफी हद तक इनकम टैक्स रिटर्न के शेड्यूल फॉरेन एसेट्स (Schedule Foreign Assets) में टैक्सपेयर द्वारा स्व-प्रकटीकरण पर निर्भर करती थी। अब जब यह डेटा AIS में दिखाई दे रहा है, तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों द्वारा रिपोर्ट की गई होल्डिंग्स और रिटर्न में टैक्सपेयर द्वारा घोषित होल्डिंग्स के बीच कोई भी महत्वपूर्ण अंतर विभाग के ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा फ्लैग किए जाने की संभावना है।
यह बदलाव विशेष रूप से नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (Non-Resident Indians), लौट रहे निवासियों (returning residents) जिनके पास अभी भी विदेशी खाते हो सकते हैं, और विदेशी निवेश या व्यावसायिक हितों वाले भारतीय निवासियों के लिए प्रासंगिक है। जब कोई विसंगति पाई जाती है, तो टैक्स विभाग स्पष्टीकरण या अपडेटेड फाइलिंग मांगने के लिए नोटिस जारी कर सकता है। AIS की सक्रिय रूप से समीक्षा करने से टैक्सपेयर्स को विभाग से औपचारिक पूछताछ प्राप्त होने से पहले संभावित त्रुटियों या चूकों को दूर करने की अनुमति मिलती है।
टैक्सपेयर्स के लिए कदम
टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (Income Tax e-filing portal) में लॉग इन करके और AIS सेक्शन में जाकर इस जानकारी तक पहुंच सकते हैं। AIS में दिखाई गई डिटेल्स की तुलना व्यक्तिगत रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और पिछले टैक्स फाइलिंग से करने की सलाह दी जाती है। यदि कोई टैक्सपेयर मानता है कि प्रदर्शित जानकारी गलत है, तो पोर्टल डेटा पर विवाद करने या स्पष्ट करने के लिए फीडबैक मैकेनिज्म (feedback mechanism) प्रदान करता है।
जैसे-जैसे टैक्स विभाग अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना जारी रखता है, गैर-अनुपालन की पहचान करने में आसानी बढ़ रही है। विदेशी आय और संपत्ति के खुलासे सटीक होना अब केवल एक सर्वोत्तम अभ्यास नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जांच और ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम (Black Money (Undisclosed Foreign Income and Assets) and Imposition of Tax Act) के तहत संभावित दंड से बचने के लिए एक आवश्यक कदम है, यदि विसंगतियां जानबूझकर या महत्वपूर्ण पाई जाती हैं।
