31 जुलाई की ITR डेडलाइन टालने के लिए कुछ लोग फ़र्ज़ी बिज़नेस इनकम दिखा रहे हैं, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारी इस पर कड़ी चेतावनी दे रहे हैं। ये तरीका आपके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि इससे आपका रिटर्न अमान्य (invalid) हो सकता है और आप पर पेनाल्टी भी लग सकती है।
Detailed Coverage
ITR फाइलिंग की डेडलाइन और झमेला
जैसे-जैसे 31 जुलाई की इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन नज़दीक आ रही है, कुछ लोग इसे टालने के लिए अपनी बिज़नेस इनकम बहुत कम (nominal) दिखाने की सोच रहे हैं। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने इस चालबाज़ी के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि इस तरह के फ़र्ज़ी एलान के गंभीर कानूनी नतीजे हो सकते हैं।
फाइलिंग की असली डेडलाइन का राज
चालू असेसमेंट ईयर में, जिन लोगों की कमाई सिर्फ़ सैलरी, पेंशन या मकान-किराए से होती है, उनके लिए ITR फाइल करने की आम डेडलाइन 31 जुलाई है। वहीं, 31 अगस्त की एक्सटेंडेड डेडलाइन सिर्फ़ उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिनकी असली बिज़नेस या प्रोफेशनल इनकम है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ़ थोड़ी सी इनकम दिखाकर, बिना किसी असली बिज़नेस एक्टिविटी के, आप इस एक्सटेंशन के हक़दार नहीं बन सकते।
गलत जानकारी देने के कानूनी खतरे
फाइलिंग की डेडलाइन से छेड़छाड़ करने की कोशिश में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को डिफ़ॉल्ट या अमान्य (invalid) करार दे सकता है। अगर आप अपनी असली इनकम के सोर्स के हिसाब से लागू डेडलाइन मिस करते हैं या गलत ITR फॉर्म भरते हैं, तो आपका रिटर्न 'बिलेटेड रिटर्न' (belated return) माना जाएगा। इससे आप कुछ टैक्स बेनिफिट्स खो सकते हैं, बाकी टैक्स पर ब्याज लग सकता है और नियमों का पालन न करने पर आप पर फ़ाइन भी लग सकता है।
इंट्रा-डे ट्रेडिंग और टैक्स नियम
कई बार निवेशक पूछते हैं कि क्या इंट्रा-डे स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने से फाइलिंग की डेडलाइन बढ़ जाती है? असली इंट्रा-डे ट्रेडिंग, जैसे कि इक्विटी या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में, को आमतौर पर 'स्पेकुलेटिव बिज़नेस इनकम' (speculative business income) के तहत गिना जाता है। जो टैक्सपेयर्स पूरे फाइनेंशियल ईयर में ठीक-ठाक और डॉक्यूमेंटेड ट्रेडिंग करते हैं, वे बाद की डेडलाइन के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं। लेकिन, इन ट्रांजैक्शंस के सपोर्ट में पूरे फाइनेंशियल ईयर के असली ट्रेडिंग रिकॉर्ड्स होने ज़रूरी हैं। सिर्फ़ फाइलिंग डेट को प्रभावित करने के लिए ट्रेडिंग एक्टिविटी को झूठा दिखाना या गलत तरीके से पेश करना टैक्स नियमों का उल्लंघन है।
सही ITR फॉर्म चुनना क्यों है ज़रूरी?
सही ITR फॉर्म चुनना एक सही फाइलिंग के लिए बहुत अहम है। टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपनी इनकम के सोर्स को ध्यान से देखकर ही सही ITR फॉर्म भरें। उदाहरण के लिए, सैलरी इनकम के लिए ITR-1 और बिज़नेस इनकम के लिए ITR-3। डेडलाइन के हिसाब से फॉर्म चुनने की गलती न करें। सही और सच्ची जानकारी देने से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को आसानी से प्रोसेस कर सकेगा। इसलिए, 31 जुलाई की डेटलाइन से पहले पूरी और सच्ची जानकारी देने पर ध्यान दें, ताकि बाद में रिवाइज्ड या बिलेटेड रिटर्न भरने की झंझट से बचा जा सके।
