ITC का रेवेन्यू ₹83,300 करोड़ के पार; चेयरमैन ने Resilience की ज़रूरत बताई

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AuthorAditya Rao|Published at:
ITC का रेवेन्यू ₹83,300 करोड़ के पार; चेयरमैन ने Resilience की ज़रूरत बताई

ITC लिमिटेड ने पिछले 5 सालों में **10.7%** का रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया है, जिसमें नॉन-सिगरेट सेगमेंट का योगदान अब कुल रेवेन्यू का दो-तिहाई हो गया है। चेयरमैन संजीव पुरी ने ग्लोबल इकोनॉमिक अस्थिरता से निपटने के लिए बिज़नेस को 'एंटी-फ्रैजाइल' मॉडल बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। कंपनी का फोकस डोमेस्टिक वैल्यू चेन और डिजिटल एडॉप्शन पर है ताकि सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों के बावजूद ग्रोथ बनी रहे।

Detailed Coverage

ITC के फाइनेंशियल्स में ज़बरदस्त सुधार

भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक ITC लिमिटेड ने अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में अपने कामकाज के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर अहम जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि उसका नेट सेगमेंट रेवेन्यू ₹83,300 करोड़ के पार निकल गया है, जो लगातार ग्रोथ को दिखाता है। पिछले 5 सालों में, ITC ने रेवेन्यू में 10.7% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बनाए रखा है, जबकि EBITDA में 9.7% की ग्रोथ देखी गई है।

डाइवर्सिफिकेशन और फाइनेंशियल स्ट्रेंथ

कंपनी के फाइनेंशियल्स का एक अहम पहलू यह है कि अब वह अपने सिगरेट बिज़नेस पर कम निर्भर है। फिलहाल, नॉन-सिगरेट बिज़नेस, जिसमें FMCG, एग्री-बिज़नेस और पेपरबोर्ड शामिल हैं, कुल सेगमेंट रेवेन्यू का लगभग दो-तिहाई हिस्सा कवर करते हैं। FMCG डिवीज़न में भी काफी बड़ा उछाल आया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2021 के लगभग ₹14,720 करोड़ से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2026 तक ₹24,200 करोड़ से ज़्यादा हो गया है। इस ग्रोथ के साथ ही, कंपनी ने शेयरधारकों को रिटर्न देने पर भी ध्यान केंद्रित किया है, पिछले 5 सालों में लगभग ₹85,000 करोड़ का डिविडेंड बांटा है।

ग्लोबल अस्थिरता से निपटना

चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा कि ग्लोबल अस्थिरता अब कभी-कभी होने वाली समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने ख़ास तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों को अनिश्चितता का मुख्य कारण बताया, जो एनर्जी सिक्योरिटी और ट्रेड को प्रभावित कर रहे हैं। इसके जवाब में, उन्होंने भारतीय बिज़नेस से अपनी स्ट्रैटेजी को सिर्फ रेज़िलिएंस (स्थिरता) से 'एंटी-फ्रैजाइल' (अस्थिरता में और मज़बूत होने वाला) मॉडल की ओर ले जाने का सुझाव दिया।

इस एंटी-फ्रैजाइल मॉडल में कई स्ट्रैटेजिक पिलर्स शामिल हैं: लोकली एंकर्ड वैल्यू चेन्स को मज़बूत करना, MSMEs के साथ पार्टनरशिप को गहरा करना और इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन (आयात प्रतिस्थापन) को बढ़ावा देना। इन क्षेत्रों को बढ़ावा देकर, कंपनी का लक्ष्य अस्थिर ग्लोबल सप्लाई चेन्स और महंगाई के दबावों पर अपनी निर्भरता कम करना है। इसके अलावा, ITC लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस के लिए डिजिटल एडॉप्शन और क्लाइमेट स्टीवर्डशिप पर भी ज़ोर देना जारी रखे हुए है।

भविष्य की ग्रोथ और एक्सपोर्ट फोकस

घरेलू ऑपरेशन्स से आगे बढ़कर, ITC भारत की फॉरेन एक्सचेंज कमाई में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहा है, जिसने पिछले 5 सालों में लगभग $6.5 बिलियन कमाए हैं, जिसमें एग्री-एक्सपोर्ट्स का हिस्सा 60% से अधिक रहा है। आगे बढ़ते हुए, कंपनी R&D, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबली कॉम्पिटिटिव ब्रांड्स के डेवलपमेंट में इन्वेस्टमेंट को प्राथमिकता दे रही है। इन पहलों से कंपनी के ग्रोथ इंजिन्स को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जो बाहरी आर्थिक दबावों के दौरान भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें। निवेशकों को FMCG सेगमेंट में कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और नई मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी पर होने वाले प्लान्ड कैपिटल स्पेंड के एग्जीक्यूशन पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.