हॉलिडे से पहले बाज़ार में दिखी उठापटक
गुड फ्राइडे की छुट्टी से पहले, भारतीय शेयर बाज़ारों ने 2 अप्रैल के ट्रेडिंग सेशन में काफी इंट्राडे उतार-चढ़ाव के बाद रिकवरी दिखाई। Nifty 50 अपने दिन के निचले स्तरों से उबरकर ऊपर बंद हुआ, जिसका मुख्य श्रेय टेक्नोलॉजी स्टॉक्स की मज़बूत परफॉरमेंस और भारतीय रुपये में आई ऐतिहासिक तेज़ी को जाता है। बाज़ार में यह सेक्टर-विशिष्ट (sector-specific) उछाल और व्यापक बाज़ार के सूचकांकों की सुस्ती के बीच का अंतर, बाज़ार खुलने पर निवेशकों के लिए एक अहम फैक्टर रहेगा।
AI की डिमांड से IT स्टॉक्स में तेज़ उछाल
2 अप्रैल को इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) स्टॉक्स सबसे मज़बूत परफॉर्मर रहे। Nifty IT इंडेक्स में 2.6% का उछाल देखा गया। इस सेक्टर की मज़बूती में HCL Technologies, Tech Mahindra और Tata Consumer Products जैसी बड़ी कंपनियों का योगदान रहा, जो Nifty 50 के टॉप गेनर्स में शामिल थीं। HCL Technologies ने खास तौर पर शानदार प्रदर्शन किया है, जिसने जनवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच 28.86% का रिटर्न दिया है, जो TCS, Infosys, Tech Mahindra और Wipro जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी बेहतर है। IT सेक्टर का यह सॉलिड परफॉरमेंस, जबकि व्यापक बाज़ार चुनौतियों का सामना कर रहा था, AI एडॉप्शन (adoption) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स से बढ़ती हुई मांग का संकेत देता है। अनुमान है कि यह सेक्टर फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) तक $315 बिलियन का रेवेन्यू (Revenue) हासिल कर सकता है।
RBI के दखल से रुपये में ऐतिहासिक तेज़ी
भारतीय रुपये में 173 पैसे की अब तक की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले 12 सालों से भी ज़्यादा का रिकॉर्ड है। यह ऐतिहासिक उछाल 93.10 के स्तर पर बंद हुआ। यह ज़बरदस्त तेज़ी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सीधे दखल के कारण आई, जिसका मकसद करेंसी में हो रही सट्टेबाजी और अस्थिरता को रोकना था। केंद्रीय बैंक ने बैंकों की नेट ओपन पोजीशन (Net Open Position) को कैप करने और कुछ डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (derivative contracts) को सीमित करने जैसे कदम उठाए हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि रुपया अल्पावधि (short-term) में और मज़बूत हो सकता है और एक तय रेंज में ट्रेड करेगा। लंबी अवधि की स्थिरता डॉलर की ग्लोबल सप्लाई और तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।
व्यापक बाज़ार में बनी रही कमजोरी
IT सेक्टर और रुपये में हुई बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद, बाज़ार के व्यापक सेंटिमेंट (sentiment) में कमजोरी बनी रही। Nifty Midcap और Smallcap इंडेक्स क्रमशः 0.3% और 0.4% तक गिर गए, जो दिखाता है कि बहुत कम निवेशकों ने इस रैली में हिस्सा लिया। 2 अप्रैल को बाज़ार की रिकवरी काफी गिरावट के बाद आई थी। यह Nifty के लिए लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट थी, जो COVID-19 महामारी के दौर के बाद पहली बार देखी गई है। बाज़ार में कुछ अंदरूनी मुद्दे बने हुए हैं, जैसे विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली, $106 प्रति बैरल के करीब कच्चे तेल की कीमतें और जारी वैश्विक तनाव। IT सेक्टर भी अपने कुछ मुद्दों का सामना कर रहा है, जैसे AI से संभावित व्यवधान और स्टॉक्स के मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन (Valuation)। Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 19.96 है, BSE Sensex का P/E करीब 20.2 है, जबकि Nifty Midcap 100 का P/E रेश्यो 33.18 है, जो दर्शाता है कि कुछ स्टॉक्स महंगे हो सकते हैं। कुल मिलाकर, तेज़ी कुछ चुनिंदा सेक्टर्स पर निर्भर रही, जबकि आर्थिक कमज़ोरियाँ बनी रहीं, जो बताती है कि इस रैली में व्यापक और टिकाऊ समर्थन का अभाव था।
बाज़ार खुलने से पहले निवेशक इन पर रखेंगे नज़र
गुड फ्राइडे की छुट्टी के कारण बाज़ार बंद रहने से निवेशक 6 अप्रैल को ट्रेडिंग फिर से शुरू होने से पहले घरेलू एक्शन और वैश्विक आर्थिक रुझानों पर नज़र रखेंगे। ट्रैक करने योग्य मुख्य कारकों में RBI के विदेशी मुद्रा उपायों (forex measures) का निरंतर प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, विदेशी निवेशक के सेंटिमेंट में कोई भी बदलाव और टेक्नोलॉजी सेक्टर का प्रदर्शन शामिल होगा।