IMF का 'पॉलिसी वेस्ट' पर बड़ा खुलासा
IMF (International Monetary Fund) ने चीन की आर्थिक नीतियों का गहराई से विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 तक चीन की औद्योगिक नीतियों पर होने वाले 'पॉलिसी वेस्ट' का अनुमान GDP के करीब 4% आंका गया है। यह आंकड़ा यूरोपीय संघ (EU) के 1.5% (2022) की तुलना में काफी ज्यादा है, जो सरकारी दखलअंदाजी के भारी पैमाने को दिखाता है। IMF ने 'एक्सटर्नल इम्बैलेंसेज' (external imbalances) पर भी बार-बार चिंता जताई है। चीन का करंट अकाउंट सरप्लस 2025 तक GDP के 3.3% तक पहुंचने का अनुमान है।
एक्सपोर्ट पर निर्भरता और बढ़ते खतरे
2025 में चीन की आर्थिक ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा, करीब एक तिहाई, नेट एक्सपोर्ट्स (net exports) से आया। लेकिन इस एक्सपोर्ट पर अत्यधिक निर्भरता ओवरकैपेसिटी (overcapacity) की चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय साझेदार व्यापारिक कदम उठा सकते हैं। रेटिंग एजेंसी Moody's ने चीन की A1 क्रेडिट रेटिंग पर 'निगेटिव आउटलुक' (negative outlook) बनाए रखा है, जो व्यापार तनाव (trade tensions) से जुड़े जोखिमों को दर्शाता है। IMF का अनुमान है कि रेन्मिन्बी (Renminbi) लगभग 16% तक अंडरवैल्यूड (undervalued) है, जो एक्सपोर्ट को मजबूत कर रहा है पर एक्सचेंज रेट में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी की मांग भी बढ़ा रहा है।
कर्ज का बोझ, डिफ्लेशन का साया और बड़ी असमानताएं
व्यापारिक मोर्चों से इतर, IMF की रिपोर्ट ने चीन की घरेलू चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला है। डिफ्लेशनरी प्रेशर (deflationary pressures) एक बड़ा मुद्दा है, जहाँ IMF ने 'डिफ्लेशन' शब्द का 60 से अधिक बार इस्तेमाल किया है। इसे प्रॉपर्टी सेक्टर में लंबे समय से चल रही गिरावट और सरकारी कर्ज के भारी बोझ से दबी डोमेस्टिक डिमांड से जोड़ा गया है। सरकार का कुल कर्ज 2025 में GDP के 127% के करीब पहुँच गया है और 2026 तक 135% से ऊपर जाने का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से, जर्मनी का कर्ज 62.5% (2024) था, जबकि अमेरिका का 124.3% (2024) था। चीन का आधिकारिक मैन्युफैक्चरिंग PMI (Purchasing Managers' Index) जनवरी 2026 में 49.3 पर रहा, जो संकुचन (contraction) का संकेत देता है।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां और वैश्विक असर
IMF द्वारा चीन के लचीलेपन को स्वीकार करने के बावजूद, कई स्ट्रक्चरल कमजोरियां (structural weaknesses) चिंता का विषय बनी हुई हैं। भारी 'पॉलिसी वेस्ट' और कर्ज-आधारित निवेश से प्रोडक्टिविटी कम होने और कुछ सेक्टरों में अतिरिक्त सप्लाई (excess supply) की चिंताएं बढ़ गई हैं। IMF की 'अनावश्यक' औद्योगिक नीतियों को कम करने की सलाह इसी ओर इशारा करती है। चीन के प्रतिनिधि का यह कहना कि एक्सपोर्ट ग्रोथ 'प्रतिस्पर्धा और नवाचार क्षमता' के कारण है, न कि करेंसी डेप्रिसिएशन के कारण, IMF के रेन्मिन्बी अंडरवैल्यूएशन के अनुमान और राज्य सब्सिडी से प्रेरित व्यापार प्रथाओं की अंतरराष्ट्रीय आलोचना से मेल नहीं खाता। Moody's का निगेटिव आउटलुक सीधे तौर पर व्यापार तनाव के चीन की क्रेडिट प्रोफाइल पर 'लंबे समय तक चलने वाले नकारात्मक प्रभाव' के जोखिम को दर्शाता है।
आगे का रास्ता: ग्रोथ की रफ्तार और नीतिगत बदलाव
आगे देखते हुए, IMF ने 2026 में चीन की GDP ग्रोथ को 4.5% तक धीमा होने का अनुमान लगाया है। इसका मुख्य कारण टैरिफ (tariffs) और व्यापार नीति (trade policy) की अनिश्चितता का लगातार प्रभाव है। विश्लेषकों के अनुसार, 2025 में चीन ने 5% की ग्रोथ हासिल की थी, जबकि 2026 के लिए IMF का अनुमान 4.5% और गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसे विश्लेषकों का अनुमान 4.8% है। मार्च में होने वाली नेशनल पीपल्स कांग्रेस (National People's Congress) 4.5% से 5% की रेंज में ग्रोथ टारगेट तय कर सकती है, जो 'उच्च-गुणवत्ता' वाले विकास पर जोर देने के साथ मध्यम मंदी को स्वीकार करने का संकेत देता है। यह एक्सपोर्ट पर निर्भरता से हटकर टिकाऊ घरेलू खपत की ओर बदलाव चीन की मध्यम अवधि की आर्थिक दिशा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
