IMF की चेतावनी: 'लगातार संकटों का दौर' शुरू, AI का खतरा बढ़ा

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
IMF की चेतावनी: 'लगातार संकटों का दौर' शुरू, AI का खतरा बढ़ा
Overview

IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आगाह किया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को अब स्थिरता की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। बार-बार आने वाले झटके अब सामान्य हो गए हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की परिवर्तनकारी लेकिन विभाजनकारी क्षमता पर जोर देते हुए कहा कि फंड जुलाई में अपने वैश्विक आर्थिक अनुमानों को अपडेट करेगा।

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अब सामान्य होंगे बड़े झटके

वैश्विक वित्तीय स्थिरता एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहाँ उथल-पुथल अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल की अंतर्निहित विशेषता बन गई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने संकेत दिया है कि नीति निर्माताओं को दीर्घकालिक भविष्यवाणी की ओर वापसी की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। इसके बजाय, ध्यान संस्थागत लचीलेपन और लगातार आने वाले संकटों की श्रृंखला का सामना करने की क्षमता पर स्थानांतरित हो गया है। इन संकटों में क्षेत्रीय संघर्षों से ऊर्जा आपूर्ति के झटके, व्यापार का विखंडन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेज़ी से अपनाना शामिल है।

AI और मज़दूरी पर 'सुनामी' का खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एकीकरण पिछले औद्योगिक बदलावों की तरह एक संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इसकी तेज़ी प्रणालीगत असमानता को गहराने का जोखिम पैदा करती है। हालाँकि वर्तमान IMF मॉडलिंग से पता चलता है कि AI वैश्विक विकास को प्रति वर्ष 0.8% तक बढ़ा सकता है, लेकिन इन लाभों का वितरण एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। पिछली तकनीकी प्रगति के विपरीत, जिसने मुख्य रूप से नियमित कार्यों को लक्षित किया था, AI अब उच्च-विशेषज्ञता वाली भूमिकाओं तक पहुँच रहा है। शोध बताते हैं कि वैश्विक रोज़गार का लगभग 40% AI एकीकरण के संपर्क में है, और यह आंकड़ा उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में 60% तक बढ़ जाता है। यहाँ जोखिम केवल नौकरियों के विस्थापन का नहीं है, बल्कि मध्यम-आय वर्ग की मज़दूरी की स्थिरता का क्षरण भी है, जो श्रम बाज़ारों में 'सुनामी' जैसा प्रभाव पैदा कर सकता है, जिसे सरकारें वर्तमान में संभालने के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं हैं।

'फोरेन्सिक' मंदी का डर: संरचनात्मक कमजोरियां

स्थायी अस्थिरता की ओर इस बदलाव के पीछे राजकोषीय थकावट (Fiscal Exhaustion) का एक चिंताजनक चलन है। कई देश पहले से ही महामारी और उसके बाद की रिकवरी के दौरान सार्वजनिक बजट को बढ़ा चुके थे, जिस कारण उनके पास सीमित नीतिगत गुंजाइश बची थी। 2026 के वसंत सत्र के आंकड़ों से पता चला है कि G7 देशों में सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के औसत 128% तक पहुँच गया है, जबकि उभरते बाज़ारों का ऋण 55 वर्षों के उच्च स्तर 77% पर है। इस राजकोषीय अनुशासन की कमी भविष्य के झटकों के दौरान सरकार की बफर के रूप में कार्य करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रतिबंधित करती है। इसके अलावा, IMF अपनी विश्वसनीयता की बाधाओं का सामना कर रहा है; संस्था की मानक निगरानी, जैसे कि रूस जैसे प्रमुख भू-राजनीतिक अभिनेताओं के साथ आर्टिकल IV परामर्श (Article IV consultations) फिर से शुरू करने की इच्छा, आंतरिक राजनीतिक घर्षण और चल रहे संघर्षों के दौरान जुड़ाव की वैधता पर चिंताओं से बाधित हो रही है।

भविष्य का नज़रिया और नीति पर ध्यान

IMF के आगामी जुलाई के 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (World Economic Outlook) अपडेट में अप्रैल के विकास अनुमानों में की गई कटौती का असर दिखने की संभावना है। यह कटौती काफी हद तक मध्य पूर्व में संघर्ष के विस्तार और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान के कारण हुई थी। जैसे-जैसे फंड अपनी $1 ट्रिलियन की ऋण क्षमता के करीब पहुँच रहा है, इसका मार्गदर्शन तेजी से तकनीकी प्रसार और सामाजिक एकजुटता के चौराहे पर केंद्रित हो रहा है। सदस्य देशों के लिए, आगे का रास्ता प्रतिक्रियाशील संकट प्रबंधन से सक्रिय संरचनात्मक सुधार की ओर एक बदलाव की मांग करता है—ऐसे शिक्षा प्रणालियों को प्राथमिकता देना जो 'सीखना सीखना' (learning to learn) पर जोर देती हैं और सामाजिक सुरक्षा जाल (Social Safety Nets) को AI-संचालित श्रम बाज़ार की अस्थिरता को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.