IMF ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, जो पहले के 7.3% के अनुमान से अधिक है। IMF का यह भी मानना है कि FY27 और FY28 में भी ग्रोथ दर 6.5% के आसपास बनी रहेगी। यह सकारात्मक संकेत ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते IMF ने दुनिया की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान 0.2% घटाकर 3.1% कर दिया है।
IMF के अनुसार, भारत FY22 से लगातार 8% की औसत सालाना ग्रोथ बनाए हुए है और यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है। सरकार के मज़बूत वित्तीय प्रबंधन (Fiscal Management) के चलते, FY26 तक फिसल डेफिसिट (Fiscal Deficit) घटकर 4.4% और सरकारी कर्ज़ (Debt) GDP के 84.1% तक आने का अनुमान है।
हालिया ग्लोबल रैंकिंग में भारत का नॉमिनल GDP (Nominal GDP) कुछ समय के लिए जापान को पीछे छोड़ चौथे स्थान पर पहुँच गया था। हालांकि, IMF का कहना है कि नॉमिनल GDP रैंकिंग में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, खासकर करेंसी के बदलने से। असल आर्थिक आकार को समझने के लिए परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) को देखना बेहतर है, जिसके अनुसार भारत चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
भारत के सार्वजनिक वित्त (Public Finances) में बड़ा सुधार देखा गया है। FY21 में 9.2% पर रहा फिसल डेफिसिट FY26 तक 4.4% तक आने का अनुमान है। वहीं, सरकारी कर्ज़ 90.6% (FY21) से घटकर 84.1% (FY26) हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों और मज़बूत वित्तीय स्थिति के कारण महंगाई (Inflation) पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया गया है।
2021 से 2025 के बीच भारत ने औसतन 8% की ग्रोथ हासिल की, जबकि यूनाइटेड किंगडम (UK) में यह 3.2% और जापान में सिर्फ 1.3% रही। भारत का फिसल डेफिसिट भी कम हो रहा है, जो FY27 में 4.3% रहने का अनुमान है। इसके विपरीत, UK का कर्ज़ 93.1% और जापान का 200% GDP से भी ऊपर है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना (2024 में 84.57 से 2026 में 92.59 होने का अनुमान) नॉमिनल GDP रैंकिंग और आयात लागत को प्रभावित कर सकता है। 0.25% की बहुत कम महंगाई दर (अक्टूबर 2025 के अनुमान के अनुसार) धीमी कंज्यूमर डिमांड और डिफ्लेशन (Deflation) का संकेत भी दे सकती है। IMF का अनुमान है कि FY28 तक भारत नॉमिनल GDP में एक बार फिर UK को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर आ जाएगा।
