अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अगले दशक में सब-सहारा अफ्रीका की GDP को 4% तक बढ़ा सकता है। लेकिन यह ग्रोथ बिजली, इंटरनेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कमियों को दूर करने पर निर्भर करती है।
AI बनेगा अफ्रीका के आर्थिक विकास का इंजन?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सब-सहारा अफ्रीका क्षेत्र के लिए आर्थिक विकास का एक बड़ा जरिया बन सकता है। रिपोर्ट बताती है कि AI में अगले दस सालों में इस क्षेत्र की उत्पादकता (productivity) और कुल GDP को 4% तक बढ़ाने की क्षमता है। यह अनुमान अफ्रीकी बाजारों में निवेश करने वाले या रुचि रखने वाले निवेशकों और व्यवसायों के लिए एक बड़ी संभावना तो दिखाता ही है, साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि इस मौके का फायदा उठाने के लिए कई बड़ी बाधाओं को पार करना होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी AI के रास्ते में बड़ी रुकावट
हालांकि विकास की अपार संभावनाएं हैं, IMF का कहना है कि सब-सहारा अफ्रीका AI को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए वैश्विक स्तर पर सबसे कम तैयार क्षेत्र है। सबसे बड़ी रुकावट भरोसेमंद बिजली की कमी है। इस क्षेत्र की लगभग आधी आबादी को बिजली की स्थिर आपूर्ति नहीं मिलती है, जो AI डेवलपमेंट के लिए जरूरी डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग हार्डवेयर को चलाने के लिए एक बुनियादी जरूरत है। बिजली ग्रिड की अस्थिरता के कारण, AI-आधारित सेवाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता काफी सीमित है।
कनेक्टिविटी और डिजिटल एक्सेस का फासला
ऊर्जा के अलावा, इंटरनेट की पहुंच भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका की केवल 38% आबादी के पास ही इंटरनेट की सुविधा है, जो वैश्विक औसत 68% से काफी कम है। यह डिजिटल खाई व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए क्लाउड-आधारित AI टूल्स, ऑनलाइन लर्निंग और डिजिटल मार्केटप्लेस तक पहुंचना मुश्किल बना देती है। इस अंतर को पाटने के लिए, रिपोर्ट में फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के विस्तार और ब्रॉडबैंड की लागत को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। वर्तमान में, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकांश हिस्सा कुछ ही देशों, जैसे कि साउथ अफ्रीका, नाइजीरिया और केन्या में केंद्रित है, जहां क्षेत्र के 160 डेटा सेंटरों में से अधिकांश मौजूद हैं। इस एकाग्रता से आर्थिक असमानता बढ़ने का खतरा है, यदि छोटे या कम विकसित देश पीछे रह जाते हैं।
नीतिगत निर्णय और आर्थिक प्रभाव
AI का आर्थिक प्रभाव तकनीक से ज्यादा नीतिगत फैसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर निर्भर करेगा। वर्तमान परिस्थितियों में, IMF अगले दशक में उत्पादकता में मामूली 0.2% की वृद्धि और GDP में 0.4% की संचयी वृद्धि का अनुमान लगाता है। लेकिन, अगर सरकारें बिजली, ब्रॉडबैंड और डिजिटल कौशल में निवेश को प्राथमिकता देने में सफल रहती हैं, तो यह प्रभाव काफी बढ़कर 2.1% उत्पादकता वृद्धि तक पहुंच सकता है, जिससे GDP में अनुमानित 4% की वृद्धि होगी। इस विकास पर नजर रखने वाले निवेशक संभवतः डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति सरकारी प्रतिबद्धताओं, क्षेत्रीय बिजली क्षमता में सुधारों और AI इंजीनियरों व डेटा साइंस प्रतिभा की स्थानीय कमी को दूर करने की पहलों पर ध्यान देंगे।
