व्यापार पर मंडराया संकट
यह आर्थिक मंदी सीधे तौर पर एक महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग, होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग ठप पड़ जाने के कारण पैदा हुई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कमोडिटी की कीमतों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जरिया है। फरवरी और मार्च के बीच इस जलडमरूमध्य से शिप ट्रैफिक में लगभग 95% की भारी गिरावट देखी गई है, जिसने वैश्विक माल व्यापार (merchandise trade) को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
व्यापार वृद्धि में भारी गिरावट का अनुमान
इस व्यवधान के चलते, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक व्यापार वृद्धि दर घटकर 1.5% से 2.5% के बीच रह जाएगी, जो 2025 के अनुमानित 4.7% से काफी कम है। इसका असर ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों पर तुरंत दिखने लगा है। तेल टैंकरों की माल ढुलाई दरें (freight rates) फरवरी के अंत से 90% से अधिक उछल गई हैं, बंकर फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, और युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम (war risk insurance premiums) काफी बढ़ गए हैं। कुछ बीमाकर्ताओं ने तो फारस की खाड़ी में जहाजों के लिए कवरेज देना बंद कर दिया है।
विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा मार
इस आर्थिक झटके का सबसे बुरा असर विकासशील देशों (developing nations) पर पड़ रहा है। ये देश वैश्विक सप्लाई नेटवर्क के भीतर झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। रिसर्च बताती है कि अमीर देश मुख्य रूप से अन्य अमीर देशों से सप्लाई चेन व्यवधान का सामना करते हैं, लेकिन गरीब और विकासशील देश सभी आर्थिक स्तरों से आने वाले झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस भेद्यता (vulnerability) के कारण उनकी मुद्राओं का अवमूल्यन (currency depreciation) हो रहा है। फरवरी के अंत से मार्च के अंत तक, अफ्रीकी देशों की मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2.9% गिरीं, और लैटिन अमेरिका व कैरिबियन देशों की मुद्राएं 2.3% कमजोर हुईं।
धीमी पड़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था
दुनियाभर में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ने की आशंका है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक GDP वृद्धि 3.1% रहेगी, जबकि विश्व बैंक 2.6% की उम्मीद कर रहा है। UNCTAD भी 2026 के लिए विश्व GDP वृद्धि 2.6% रहने का अनुमान लगाता है। इस दौरान, विकसित अर्थव्यवस्थाएं (1.5%) और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं (4.1%) के विकास दर के अनुमानों में बड़ा अंतर दिख रहा है। विकासशील देशों को अक्सर बाहरी झटकों से निपटने के लिए कम वित्तीय गुंजाइश मिलती है और उनकी अर्थव्यवस्थाएं कम विविध होती हैं, जिससे वे बार-बार आने वाले बाहरी झटकों से निपटने में कम सक्षम होती हैं।
सप्लाई चेन विविधीकरण की जरूरत
होरमुज़ जलडमरूमध्य में लंबे समय से चले आ रहे व्यवधान के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर पुनर्विचार तेज हो गया है। बढ़ती भू-राजनीतिक (geopolitical) अस्थिरता 'भू-आर्थिक विखंडन' (geoeconomic fragmentation) को बढ़ावा दे रही है, जिससे व्यापार और निवेश राजनीतिक रेखाओं के साथ स्थानांतरित हो रहे हैं। कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को घरेलू स्तर पर लाने और एकल आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रही हैं। ऊर्जा विविधीकरण (energy diversification), जिसे लंबे समय से मूल्य झटके और आपूर्ति कटौती के प्रति भेद्यता को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
जोखिम और अनिश्चितता
यह संकट विशेष रूप से उन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में गहरी कमजोरियों को उजागर करता है जो पहले से ही पिछले झटकों से जूझ रही हैं। IMF का 2026 के लिए विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 1.5% GDP वृद्धि का अनुमान बताता है कि वे झटकों का सामना कर सकती हैं। हालांकि, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए 4.1% का अनुमान, भले ही अधिक हो, यह दिखाता है कि वे काफी दबाव में हैं। यहां स्थायी मुद्रास्फीति (inflation) का जोखिम है, जो सप्लाई झटकों और संभावित रूप से सख्त मौद्रिक नीति से और बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए कीमतें नियंत्रित करने या धीमी आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के बीच चयन करने की दुविधा पैदा हो गई है। उच्च परिवहन और बीमा लागत एक और चुनौती पेश करती है, जो नाजुक खाद्य प्रणालियों पर दबाव डालती है और कमजोर आबादी को और भी अधिक प्रभावित करती है।
एक खंडित विश्व का दृष्टिकोण
वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल और व्यापार मार्गों पर इसका प्रभाव एक अधिक खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रहा है। 'भू-आर्थिक विखंडन' की ओर यह रुझान व्यापार और निवेश प्रवाह को तेजी से राजनीतिक गुटों से जोड़ रहा है। इससे वैश्विक व्यापार कम सुचारू हो सकता है और राष्ट्रीय या क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता के महत्व पर प्रकाश पड़ सकता है। विश्लेषकों को अस्थिरता (volatility) की उम्मीद है। तेल की कीमतों के अनुमान संघर्ष की अवधि के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न होते हैं, और सोने की कीमतों में सुरक्षित-आश्रय संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में वृद्धि की उम्मीद है। निवेशकों को उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है जो ऊर्जा स्वतंत्रता की सरकारी कोशिशों से लाभान्वित होती हैं और जो सुरक्षित, विविध ऊर्जा प्रणालियों के लिए समाधान प्रदान करती हैं।