HSBC की भविष्यवाणी: 2026 के दूसरे हाफ में उभरते बाज़ार मचाएंगे धमाल!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HSBC की भविष्यवाणी: 2026 के दूसरे हाफ में उभरते बाज़ार मचाएंगे धमाल!

HSBC की ताज़ा रिसर्च के मुताबिक, 2026 के दूसरे हाफ में उभरते बाज़ारों (Emerging Markets) के शेयर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। इसकी मुख्य वजह है बाज़ारों का वाजिब वैल्यूएशन (Valuation) और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी ग्रोथ। आपको बता दें कि इस साल उभरते बाज़ारों ने पहले ही विकसित बाज़ारों (Developed Markets) को काफी पीछे छोड़ दिया है, जिसमें भारत और चीन खास तौर पर उभर कर सामने आए हैं।

क्यों उभरते बाज़ारों पर बुलिश है HSBC?

HSBC की रिसर्च बताती है कि 2026 के दूसरे हाफ तक इमर्जिंग मार्केट इक्विटीज़ (Emerging Market Equities) अपनी शानदार रफ़्तार बनाए रखेंगे। इस पॉजिटिव आउटलुक के पीछे कई वजहें हैं - स्टॉक्स का आकर्षक वैल्यूएशन, घटती महंगाई (Inflation) और सपोर्टिव मॉनेटरी कंडीशन। साल के पहले छह महीनों में ही इमर्जिंग मार्केट्स ने यूएस डॉलर के हिसाब से 24% का रिटर्न दिया है, जो कि यूएस और दूसरे डेवलप्ड मार्केट्स के इंडेक्स से काफी बेहतर है।

वैल्यूएशन और ग्रोथ के नए इंजन

इस तेज़ी का एक बड़ा कारण ग्लोबल इक्विटीज़ की तुलना में वैल्यूएशन में बड़ा अंतर है। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स अभी 11.5x के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (Forward P/E) पर ट्रेड कर रहा है, जबकि ग्लोबल इक्विटीज़ 17.5x के वैल्यूएशन पर हैं। यह बड़ा अंतर निवेशकों को लगातार आकर्षित कर रहा है, खासकर भारत और चीन जैसे क्षेत्रों में, जहाँ आने वाले महीनों में मज़बूत प्रदर्शन की उम्मीद है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेश की दिलचस्पी बढ़ रही है। साउथ कोरिया और ताइवान में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) से कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) सीधे तौर पर बढ़ी है। उम्मीद है कि यह ट्रेंड सिर्फ प्योर टेक्नोलॉजी फर्म्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी कंपनियों को भी शामिल करेगा जो AI का इस्तेमाल करके आर्थिक फायदा उठा सकती हैं।

जोखिम और बाज़ार की वोलेटिलिटी (Volatility)

हालांकि, आउटलुक अभी भी पॉजिटिव है, लेकिन रिपोर्ट निवेशकों को संभावित वोलेटिलिटी (Volatility) के प्रति सचेत करती है। हाई अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में भारी कैपिटल स्पेंडिंग से बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव आ सकता है। HSBC AI के जेवन्स पैराडॉक्स (Jevons Paradox) का भी ज़िक्र करती है, जहाँ एफिशिएंसी (Efficiency) में सुधार से कंप्यूटिंग रिसोर्सेज (Computing Resources) की मांग बढ़ सकती है, जिससे टेक्नोलॉजी सेक्टर में उम्मीद से ज़्यादा समय तक निवेश की ज़रूरत पड़ सकती है।

सेंट्रल बैंक की पॉलिसीज़ (Central Bank Policies) भी इस कहानी में अहम भूमिका निभाती हैं। अब फोकस तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risks) से हटकर मज़बूत आर्थिक ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग्स को सपोर्ट करने पर है। माना जा रहा है कि यूएस फेडरल रिज़र्व 2026 के बाकी समय तक अपनी मौजूदा पॉलिसी बनाए रखेगा, लेकिन सप्लाई-साइड शॉक (Supply-side Shocks) की वजह से ग्लोबल इकोनॉमिक माहौल अभी भी जटिल बना हुआ है।

आगे चलकर निवेशकों को कॉर्पोरेट अर्निंग्स की असल डिलीवरी पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर उन कंपनियों में जो AI का फायदा उठाने की पोजीशन में हैं। इसके अलावा, रीजनल सेंट्रल बैंकों की पॉलिसीज़ का विकास और इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज़ की ग्लोबल सप्लाई चुनौतियों के खिलाफ अपनी मज़बूती बनाए रखने की क्षमता, आने वाले महीनों में इन मार्केट्स के प्रदर्शन के लिए अहम इंडिकेटर साबित होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.