एनालिस्ट्स का बदला नज़रिया
HSBC के एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट (Indian Equities) पर अब पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। उन्होंने 'न्यूट्रल' से 'अंडरवेट' की रेटिंग देकर साफ कर दिया है कि उन्हें यहां से ग्रोथ की उम्मीदें कम हैं। यह फैसला मार्च में भारत को 'न्यूट्रल' करने के बाद आया है, जब उन्होंने रिस्क-रिवॉर्ड को कम आकर्षक पाया था।
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती महंगाई का खतरा
HSBC ने खासकर मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे टकराव को एक बड़ा जोखिम बताया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। एनालिस्ट्स को आशंका है कि राज्य चुनावों के बाद, जो मई की शुरुआत में हो सकते हैं, रिटेल फ्यूल प्राइस (Retail Fuel Price) बढ़ सकते हैं। ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें फिर से महंगाई को भड़का सकती हैं, जिससे मांग (Demand) की रिकवरी धीमी पड़ सकती है और बैंकिंग सेक्टर में बैड लोंस (Bad Loans) का खतरा भी बढ़ सकता है। यह पूरा परिदृश्य फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए कंपनी की कमाई (Earnings) के अनुमानों पर सवाल खड़े करता है।
वैल्यूएशन पर भी दबाव
क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी का सीधा असर कॉर्पोरेट कमाई पर लगभग 1.5% की गिरावट के रूप में देखा गया है। HSBC का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए 16% की ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) कमाई वृद्धि के मौजूदा अनुमानों में कटौती करनी पड़ सकती है। हालांकि, स्टॉक्स के वैल्यूएशन (Valuations) अपने टॉप लेवल से कुछ कम हुए हैं, लेकिन अगर कमाई के अनुमान कम होते हैं तो इन पर और दबाव आ सकता है, खासकर तब जब इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) में तेजी न आए।
विदेशी निवेशकों की चिंता
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) को रुपये (Rupee) में आई बड़ी गिरावट का भी सामना करना पड़ा है, जिससे उनके कुल रिटर्न पर बुरा असर हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) को लेकर चिंताएं, खासकर सॉफ्टवेयर सर्विसेज सेक्टर (Software Services Sector) के लिए, भी निवेशकों के सेंटीमेंट पर भारी पड़ रही हैं।
