नए अनुपालन के निर्देश
सरकार के संशोधित निर्देश, जो नवंबर 2025 से लागू होने वाले चार नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के साथ प्रभावी होंगे, केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्त निकायों और सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) पर कड़े दायित्व डालते हैं। प्रोक्योरमेंट (Procurement) से जुड़े अनुपालन उपायों के तहत अब यह तय किया गया है कि कॉन्ट्रैक्टर्स को मजदूरी का भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ही करना होगा। इस बदलाव का मकसद मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाना है।
भुगतान की सख्त समय-सीमा और पेनल्टी
व्यय विभाग (Department of Expenditure) के प्रोक्योरमेंट पॉलिसी डिवीजन द्वारा जारी किए गए इस आदेश में मजदूरी भुगतान की विशिष्ट समय-सीमाएं बताई गई हैं। डेली वेज (Daily wage) अर्नर्स को उनकी शिफ्ट खत्म होने से पहले, वीकली (Weekly) वर्कर्स को उनके हॉलिडे से पहले, और फोर्टनाइटली (Fortnightly) वर्कर्स को फोर्टनाइट खत्म होने के दो दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। मंथली (Monthly) पेमेंट्स के लिए थोड़ी अधिक मोहलत है, जो अगले महीने की सातवीं तारीख तक देय होंगी। अगर कॉन्ट्रैक्टर्स इन समय-सीमाओं का पालन नहीं करते हैं, तो सरकारी निकाय मजदूरों को सीधे भुगतान करेंगे और फिर कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई करेंगे। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से देशव्यापी बैन का खतरा मंडराएगा।
प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जवाबदेही
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH&WC) कोड, 2020 के अनुसार, प्रिंसिपल एम्प्लॉयर्स (Principal Employers) अब कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रूप से जिम्मेदार होंगे। इसमें कॉन्ट्रैक्ट की स्पष्ट शर्तें तय करना और आउटसोर्स किए गए स्टाफ के लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs) मासिक आधार पर कॉन्ट्रैक्टर के अनुपालन का सत्यापन करेंगे, जिससे मजदूरी में देरी और लेबर डिस्प्यूट्स को रोका जा सके।
लेबर अनरेस्ट को संबोधित करना
ये अपडेटेड निर्देश ऐसे समय में आए हैं जब विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में लेबर अनरेस्ट (Labour unrest) बढ़ा है। भुगतान प्रक्रियाओं को मानकीकृत करके और पेनल्टी लागू करके, सरकार का लक्ष्य कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए काम करने की स्थिति में सुधार करना और औद्योगिक विवादों को कम करना है। लेबर कोड्स को लागू करने के लिए अंतिम नियमों की घोषणा भी शुक्रवार को की गई, जो लेबर प्रैक्टिसेज में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
