₹69,000 की मांग का आधार?
नेशनल काउंसिल (जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी – NC-JCM) के स्टाफ साइड ने सरकार को एक मेमोरेंडम सौंपा है, जिसमें ₹69,000 को मिनिमम वेज बनाने की मांग की गई है। यह राशि 'लिविंग वेज' की गणना पर आधारित है, जिसका उद्देश्य पोषण, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और डिजिटल ज़रूरतों जैसी आवश्यक वस्तुओं पर होने वाले खर्च को कवर करना है।
5 यूनिट फैमिली फॉर्मूला क्यों?
इस मांग का एक अहम हिस्सा परिवार की गणना के लिए 5 यूनिट का ढांचा अपनाना है, जो मौजूदा 3 यूनिट मॉडल से ज़्यादा है। इस नए ढांचे में कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और आश्रित माता-पिता शामिल होंगे। इसे वर्तमान सामाजिक समर्थन संरचनाओं और माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम जैसे कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताया गया है।
पोषण और फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी
प्रस्तावित लिविंग वेज फॉर्मूले में पोषण मानकों को भी अपडेट किया गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 3,490 कैलोरी की सिफारिश की गई है। यह पिछले वेतन आयोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए 2,700 कैलोरी के बेंचमार्क से काफी ज़्यादा है। वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए, कर्मचारी संघ 3.83 के फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की वकालत कर रहे हैं, जो 7वें वेतन आयोग के 2.57 के बेंचमार्क से काफी ज़्यादा होगा।
आर्थिक तर्क और सरकारी खजाने पर असर
मेमोरेंडम में यह भी तर्क दिया गया है कि वेतन-संबंधी व्यय केंद्र सरकार के कुल रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure) का केवल 13% है। साथ ही, यह सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों की आय में वृद्धि से खपत बढ़ेगी, आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा और अंततः टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा। इसे लागत के बजाय मानव पूंजी और आर्थिक विकास में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।
