सरकारी खर्च में 19% की उछाल! सीमेंट कंपनियों की बल्ले-बल्ले, पर इन वजहों से बढ़ रही चिंता

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
सरकारी खर्च में 19% की उछाल! सीमेंट कंपनियों की बल्ले-बल्ले, पर इन वजहों से बढ़ रही चिंता

भारत में सरकारी और CPSEs के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में 19% का इजाफा हुआ है, जिससे सीमेंट की मांग को बूस्ट मिलने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन हाउसिंग सेक्टर (Housing Sector) में नरमी बनी हुई है, जिससे सीमेंट कंपनियों के लिए मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, सीमेंट सेक्टर को आस

चालू वित्त वर्ष (Financial Year) के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल-मई 2026) में सरकार और CPSEs (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज) के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में 19% की शानदार बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले दो सालों की तुलना में सार्वजनिक निवेश में तेजी का संकेत है, जिससे सीमेंट सेक्टर के लिए उम्मीदें जगी हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम हाउसिंग की गिरावट

इस ग्रोथ का मुख्य कारण CPSEs का मजबूत खर्च है, जिन्होंने FY27 की पहली तिमाही में अपने कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) में 26% का इजाफा कर ₹2.1 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया। सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट (State Government) के खर्चों में भी क्रमशः 13% और 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की यह रफ्तार हाउसिंग सेक्टर (Housing Sector) में लंबे समय से जारी मंदी के कारण थोड़ी धीमी पड़ सकती है। अप्रैल-मई 2026 में रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी (Residential Property) लॉन्च में पिछले साल के मुकाबले 14% की गिरावट आई है। इससे मांग में दो तरह के रुझान देखने को मिल रहे हैं - इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (Infrastructure Projects) वॉल्यूम को सहारा दे रहे हैं, लेकिन प्राइवेट घरों के निर्माण में कमजोरी कुल ग्रोथ को सीमित कर रही है।

रीजनल प्राइजिंग और इनपुट कॉस्ट का खेल

इन रुझानों का असर सीमेंट की रीजनल प्राइजिंग (Regional Pricing) पर भी दिख रहा है। जुलाई 2026 तक, मॉनसून (Monsoon) की शुरुआत के साथ देश भर में मांग के स्तर अलग-अलग रहे। वेस्टर्न (Western) और सेंट्रल इंडिया (Central India) में सीमेंट बैग की कीमतों में लगभग ₹5 प्रति बैग की गिरावट आई है, जबकि हैदराबाद जैसे बाजारों में ₹8 प्रति बैग का इजाफा देखा गया है। उत्तरी (Northern) और पूर्वी (Eastern) क्षेत्रों में कीमतें ज्यादातर स्थिर बनी हुई हैं।

वहीं, कंपनियां इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में बदलाव से जूझ रही हैं। क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में कुछ राहत मिली है, लेकिन पेटकोक (Petcoke) अभी भी एनर्जी-इंटेंसिव (Energy-Intensive) सीमेंट प्रोडक्शन के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है। पेटकोक की कीमतें फिलहाल $133 प्रति टन के आसपास हैं। यह हाल के उच्चतम स्तर $168 प्रति टन से कम है, लेकिन FY26 की चौथी तिमाही के मुकाबले लगभग $20 प्रति टन ज्यादा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये बढ़ी हुई लागतें FY27 की दूसरी तिमाही तक प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर ज्यादा असर डालना शुरू कर देंगी। निवेशकों के लिए, आने वाले महीनों में सीमेंट कंपनियों की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (Financial Performance) को मैनेज करने की क्षमता, इन इनपुट कॉस्ट्स को संतुलित करने और असमान रीजनल मांग के बीच प्रदर्शन करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.