भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सात सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर और एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetisation) के ज़रिए **₹26,639.33 करोड़** जुटाए हैं। यह राशि FY27 के लिए **₹80,000 करोड़** के कुल मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स (Miscellaneous Capital Receipts) के लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है।
Detailed Coverage
सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री से बड़ी कमाई
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक ₹26,639.33 करोड़ की रकम जुटाई गई है। इसमें से अकेले सात सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से ₹20,272.40 करोड़ आए हैं। वहीं, विभिन्न एसेट मोनेटाइजेशन पहलों से ₹6,366.93 करोड़ का योगदान मिला है।
किन कंपनियों में बेची गई हिस्सेदारी?
इस साल सरकार ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी (NHPC), एनएलसी इंडिया (NLC India), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और कोचीन शिपयार्ड जैसी प्रमुख पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) में अपनी हिस्सेदारी बेची है। ये कंपनियां बैंकिंग, ऊर्जा, बीमा और रेलवे फाइनेंसिंग जैसे अलग-अलग सेक्टरों में काम करती हैं।
मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स का ₹80,000 करोड़ का लक्ष्य
सरकार ने 2023-24 फाइनेंशियल ईयर से डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) के लिए अलग से सालाना लक्ष्य रखना बंद कर दिया है। अब इस तरह की सारी कमाई को 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' के तहत गिना जाता है। FY27 के लिए इस मद में ₹80,000 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है।
बाज़ार की चाल पर निर्भर है आगे की रणनीति
वित्त मंत्रालय का कहना है कि इन सौदों को पूरा करने की कोई तय समय-सीमा नहीं है। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। भविष्य में होने वाली बिक्री घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक हालात, निवेशकों का मूड, बाज़ार में लिक्विडिटी (Liquidity) और कंपनियों की तैयारी पर निर्भर करेगी।
