सरकारी खजाने में ₹20,000 करोड़ की भारी बढ़ोतरी! FY27 की पहली तिमाही में विनिवेश से रिकॉर्ड कमाई

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
सरकारी खजाने में ₹20,000 करोड़ की भारी बढ़ोतरी! FY27 की पहली तिमाही में विनिवेश से रिकॉर्ड कमाई

भारत सरकार ने FY27 की पहली तिमाही में सात 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) सौदों के जरिए **₹20,000 करोड़** से अधिक की राशि जुटाई है। यह तेज शुरुआत सरकार के वित्तीय लक्ष्यों को मजबूत करने में मदद करेगी, खासकर जब सब्सिडी खर्च और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के बीच संतुलन साधना हो।

रिकॉर्ड तोड़ विनिवेश, चार साल का उच्च स्तर

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विनिवेश (Disinvestment) से ₹20,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके पिछले चार सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने सात सरकारी कंपनियों में अपनी छोटी हिस्सेदारी 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए बेचकर यह राशि जुटाई है।

मुख्य सौदे और OFS की प्रक्रिया

इन सौदों में कोल इंडिया, एनएचपीसी (NHPC), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC), एनएलसी इंडिया (NLC India) और कोचीन शिपयार्ड जैसी बड़ी सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी की बिक्री शामिल है। 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) की प्रक्रिया से सरकार स्टॉक एक्सचेंज पर सीधे शेयर बेच सकती है, जो किसी नए आईपीओ (IPO) की तुलना में तेज और कम कागजी कार्रवाई वाला होता है। निवेशकों के लिए, यह स्थापित सरकारी कंपनियों में मौजूदा बाजार भाव से थोड़ी कम कीमत पर निवेश का अच्छा अवसर होता है।

वित्तीय स्थिति और आगे की योजना

साल की शुरुआत में यह तेज गतिविधि महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने FY27 के लिए ₹80,000 करोड़ का 'विविध पूंजीगत प्राप्तियां' (Miscellaneous Capital Receipts) लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर जुटाई गई राशि शामिल है। यह कलेक्शन बढ़ाना जरूरी है क्योंकि सरकार खाद्य और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ते खर्च के कारण वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) के दबाव का सामना कर रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का भी इस पर असर पड़ा है। सरकार की लिस्टेड सरकारी कंपनियों में ₹41 लाख करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी है, जो बजट लक्ष्यों को पूरा करने के लिए और अधिक हिस्सेदारी बेचने की काफी गुंजाइश दिखाती है।

आगे चलकर, बाजार को विनिवेश की एक सतत धारा की उम्मीद है। हालांकि, अचानक कीमतों में गिरावट से बचने के लिए सरकार ने अभी किसी विशेष समय-सारणी की घोषणा नहीं की है। एलआईसी (LIC) और कई अन्य सरकारी बैंकों जैसे प्रमुख संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने की चर्चाएं जारी हैं। इसके अलावा, सरकार एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) और इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) जैसी संस्थाओं को लिस्ट कराने की भी योजना बना रही है।

निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि केवल पैसा जुटाने के अलावा, कई बिक्री नियामक आवश्यकता के कारण भी हो रही हैं - जैसे कि लिस्टेड कंपनियों को कम से कम 25% सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखनी होती है। इसलिए, आक्रामक विनिवेश लक्ष्यों के बिना भी, सरकार को उन कंपनियों में शेयर बेचने पड़ सकते हैं जहाँ उनकी हिस्सेदारी 75% की सीमा से काफी ऊपर है। आने वाली तिमाहियों में बिक्री की गति, संस्थागत निवेशकों की मांग और सरकारी शेयरों के लिए बाजार की भावना को संतुलित करने की सरकार की क्षमता पर नजर रहेगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.