10% गिरावट से GDP में 0.5% की कमी का अनुमान
Goldman Sachs के इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 में अमेरिका की GDP ग्रोथ 2.5% रह सकती है, जो बाज़ार की आम राय से थोड़ी बेहतर है। हालांकि, यह उम्मीद शेयर बाज़ार में होने वाली संभावित गिरावट के जोखिम से भरी हुई है। फर्म का अनुमान है कि अगर 2026 की दूसरी तिमाही तक इक्विटी की कीमतों में लगातार 10% की गिरावट आती है, तो यह GDP ग्रोथ को 0.5% अंक तक कम कर सकती है।
इसका मुख्य कारण 'वेल्थ इफेक्ट' (Wealth Effect) है। जब शेयर बाज़ार गिरता है, तो खासकर उच्च आय वर्ग के लोगों की संपत्ति का मूल्य कम हो जाता है, जिससे उनका खर्च घट जाता है। चूंकि ये लोग इक्विटी ज़्यादा रखते हैं और कंजम्पशन (Consumer Spending) को बढ़ाते हैं, इसलिए इनकी खर्च करने की क्षमता में आई कमी से इकोनॉमी पर सीधा असर पड़ता है। अगर करेक्शन 20% तक गंभीर हो जाता है, खासकर अगर यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण लेबर मार्केट में कुछ बाधाओं के साथ होता है, तो आर्थिक विस्तार के लिए यह और भी बड़ा झटका साबित हो सकता है।
बाज़ार की असलियत: दिखती मजबूती के पीछे छुपी कमजोरियां
Goldman Sachs भले ही 2026 के लिए कुछ अन्य फर्मों की तुलना में बेहतर आउटलुक (Outlook) बता रही हो (पूरे साल के लिए 2.8% GDP ग्रोथ का अनुमान), लेकिन बाज़ार की अंदरूनी कमजोरियों पर उसकी चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, J.P. Morgan ने 2026 में अमेरिका और ग्लोबल मंदी की 35% संभावना जताई है, जिसका कारण लगातार बनी हुई महंगाई (Inflation) और सुस्त पड़ता लेबर मार्केट है। वहीं, Morgan Stanley का मानना है कि ग्रोथ मध्यम रहेगी, लेकिन संभावनाओं का दायरा काफी बड़ा है।
अमेरिका की इकोनॉमी फिलहाल मजबूत बिजनेस इन्वेस्टमेंट (Business Investment), खासकर AI में, और टैक्स कट्स (Tax Cuts) से मिले सपोर्ट से जारी कंज्यूमर स्पेंडिंग पर टिकी हुई है। हालांकि, 2026 की शुरुआत तक महंगाई फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिससे फेड के लिए संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। उम्मीद है कि जनवरी में पॉज़ (Pause) के बाद, फेड साल के अंत में रेट कट्स (Rate Cuts) फिर से शुरू करेगा, जिसका लक्ष्य फेडरल फंड्स रेट को 3% के करीब लाना है। लेकिन, इस पर अंदरूनी मतभेद हैं कि कट कितनी तेज़ी से होंगे।
क्यों है इतना ख़तरा? (The Forensic Bear Case)
AI की तरक्की और फिस्कल स्टिमुलस (Fiscal Stimulus) से बढ़ी हुई ग्रोथ की कहानी के पीछे कई छिपी हुई कमजोरियां हैं। बाज़ार का वैल्यूएशन (Valuation) काफी खिंचा हुआ दिख रहा है। वॉरेन बफेफेट इंडिकेटर (Warren Buffett Indicator) 220.1% के चिंताजनक स्तर पर है, जो 2022 के करेक्शन से पहले के स्तर से भी ऊपर है। यह बताता है कि बाज़ार प्राइस रीसेट (Price Reset) के प्रति बहुत संवेदनशील है।
प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और बिजनेस इन्वेस्टमेंट के लिए इकोनॉमी का AI पर निर्भर रहना, ग्रोथ तो दे रहा है, लेकिन इसमें बबल (Bubble) का जोखिम भी है। अगर AI का प्रोडक्टिविटी पर असर उम्मीद से कम रहा या इसने बड़े पैमाने पर बिना किसी मुआवज़े के लेबर डिस्प्लेसमेंट (Labor Displacement) किया, तो यह एक गंभीर आर्थिक मंदी ला सकता है। K-शेप्ड इकोनॉमी (K-Shaped Economy) का बने रहना, जहाँ ज़्यादातर खर्च की शक्ति कुछ हाई-इनकम ग्रुप्स के हाथों में है, मार्केट करेक्शन के जोखिम को और बढ़ा देता है।
इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के फैसले भी अनिश्चितताओं से घिरे हैं। 2026 के मध्य में एक नए चेयरमैन के आने से पॉलिसी में अनिश्चितता बढ़ सकती है। महंगाई का लगातार बने रहना फेड को मुश्किल स्थिति में डालता है: या तो महंगाई रोकने के लिए रेट्स बहुत ज़्यादा बढ़ा दो, या फिर इतना कम एक्शन लो कि महंगाई स्थायी हो जाए। दोनों ही सूरतें मार्केट स्टेबिलिटी (Market Stability) के लिए ठीक नहीं हैं। ऐतिहासिक रूप से, भले ही मार्केट करेक्शन अकेले मंदी का कारण न बनें, लेकिन ये मौजूदा आर्थिक कमजोरियों को कई गुना बढ़ा सकते हैं और फाइनेंशियल इनस्टेबिलिटी (Financial Instability) को ट्रिगर कर सकते हैं।
भविष्य का नज़रिया
इन सब जोखिमों के बावजूद, 2026 के लिए अमेरिका की GDP ग्रोथ का बेसलाइन अनुमान 2% से 2.5% की रेंज में बना हुआ है। उम्मीद है कि आने वाली फिस्कल पॉलिसी और AI-बेस्ड इन्वेस्टमेंट इसे सहारा देंगे। फेडरल रिजर्व के रेट कट्स से भी रिस्क एसेट्स (Risk Assets) को कुछ सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों को एक बड़े मार्केट करेक्शन की संभावना पर सतर्क रहने की ज़रूरत है, जो कंज्यूमर स्पेंडिंग को सीमित करके और मौजूदा आर्थिक कमजोरियों को बढ़ाकर इस तस्वीर को तेज़ी से बदल सकता है।