GoalFi के एनालिस्ट Robin Arya का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस जुलाई ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, लेकिन 2026 तक दरों में बढ़ोतरी का जोखिम है। उन्होंने निवेशकों को हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है, जो बाजार की अस्थिरता के बावजूद घरेलू मांग से प्रेरित हो सकते हैं।
2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का खतरा?
GoalFi के संस्थापक और प्रबंध निदेशक Robin Arya ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी 29 जुलाई को होने वाली बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। वर्तमान में फेड फंड रेट 3.50% से 3.75% के बीच है, लेकिन 3.8% के आसपास मंडराती महंगाई फेड के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। Arya का मानना है कि 2026 तक ब्याज दरों में कटौती के बजाय बढ़ोतरी का जोखिम ज्यादा है, जिसका असर वैश्विक बाजार की लिक्विडिटी (liquidity) और उधार की लागत पर पड़ सकता है।
बाजार की अस्थिरता और लार्ज-कैप की परफॉर्मेंस
निवेशकों को चालू तिमाही में बाजार में जारी अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। Arya ने लार्ज-कैप कंपनियों की संरचनात्मक कमजोरियों को इसका एक बड़ा कारण बताया है, और कहा है कि निफ्टी 50 के कई स्टॉक्स (stocks) धीमी ग्रोथ दिखा रहे हैं। चूंकि लार्ज-कैप सेगमेंट अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, इसलिए वह इंडेक्स-आधारित निवेश से हटकर उन सेक्टरों और व्यक्तिगत शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं जिनकी फंडामेंटल्स (fundamentals) मजबूत हैं।
हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स में संभावनाएं
इस अनिश्चितता के बीच, हेल्थकेयर सेक्टर, खासकर हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक चेन, एक स्थिर निवेश क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। डायग्नोस्टिक कंपनियां 13% से 15% की ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं, जो कि निवारक स्वास्थ्य जांच और पुरानी बीमारियों के प्रबंधन की बढ़ती मांग से प्रेरित है। हालांकि अस्पतालों में रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) दिख रही है, Arya ने कहा कि नई क्षमता बढ़ाने की लागत के कारण इन फर्मों के EBITDA मार्जिन (margins) अल्पावधि में दबाव में रह सकते हैं। फिर भी, यह सेक्टर एक भरोसेमंद कमाई का जरिया माना जा रहा है।
ग्लोबल AI ट्रेंड्स और एनर्जी जोखिम
Arya ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में हालिया बिकवाली (sell-off) को हाई वैल्यूएशन (valuations) का एक जरूरी सुधार बताया, न कि तकनीक की विफलता। भारतीय बाजार के लिए, उन्होंने सलाह दी कि इस पर नजर रखी जाए कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) अपना पैसा भारतीय इक्विटी (equity) में वापस लाते हैं या नहीं, खासकर उन क्षेत्रों से जो AI में भारी रूप से निवेशित हैं।
ऊर्जा सुरक्षा (energy security) के बारे में, Arya का सुझाव था कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव चिंता का विषय होने के बावजूद, भारत पर इसका असर कम हो सकता है क्योंकि आयात के स्रोत विविध हैं। भारत का अधिकांश तेल अब रूस और अन्य सप्लायर्स से आ रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात अधिक संवेदनशील है, क्योंकि 90% आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान स्थानीय मुद्रास्फीति (inflationary pressure) और गैस पर निर्भर घरेलू कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
