अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली जारी है, खासकर Alphabet के शेयरों में गिरावट आई है. वहीं, तेल की कीमतों में भी अस्थिरता दिख रही है. ऐसे में भारतीय शेयर बाजार, निफ्टी 50, आज सपाट शुरुआत कर सकता है. निवेशक तकनीकी रेजिस्टेंस लेवल और भू-राजनीतिक विकास पर नज़र बनाए हुए हैं.
क्या हुआ?
वैश्विक बाजारों में आज उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला, खासकर अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी सेक्टर के दिग्गज Alphabet के शेयरों में आई बड़ी गिरावट और टेक सेक्टर में चौतरफा कमजोरी रही. Nasdaq Composite में 1.3% की गिरावट आई, जबकि S&P 500 0.4% नीचे बंद हुआ. इसी के साथ, कच्चे तेल की कीमतों में भी हलचल मची हुई है. अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की शुरुआती उम्मीदों से कीमतों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता को लेकर चिंताएं फिर से ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रही हैं. भारतीय बाजारों के लिए, GIFT Nifty के आंकड़ों से मंगलवार, 23 जून 2026 को फ्लैट से सकारात्मक शुरुआत का संकेत मिल रहा है, क्योंकि घरेलू निवेशक इन मिले-जुले वैश्विक संकेतों का आकलन कर रहे हैं.
टेक सेक्टर में कमजोरी और Alphabet
Alphabet जैसी बड़ी टेक कंपनियों में बिकवाली के बाद निवेशक टेक्नोलॉजी सेक्टर पर कड़ी नजर रख रहे हैं. कंपनी के DeepMind AI यूनिट से कर्मचारियों के इस्तीफे की खबरों और बढ़ते पूंजीगत व्यय (capital expenditure) और ऊंचे वैल्यूएशन (valuation) को लेकर निवेशकों की चिंताओं के कारण शेयर दबाव में हैं. विश्लेषकों का मानना है कि शेयर प्रीमियम पर कारोबार कर रहा था, जिससे कुछ निवेशकों ने अपनी पोजीशन पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है. टेक इंडस्ट्री में फ्री कैश फ्लो (free cash flow) में कमी की चिंताओं के साथ इस सेक्टर में व्यापक सतर्कता ने अमेरिकी बाजारों में समग्र भावना को प्रभावित किया है, जिससे अधिक रक्षात्मक क्षेत्रों (defensive sectors) की ओर रुझान बढ़ा है.
तेल की कीमतों का खेल
कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजार की स्थिरता के लिए एक प्रमुख संकेतक बन गई हैं. अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य - जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है - को लेकर चल रही बातचीत की प्रगति पर करीब से नजर रखी जा रही है. संभावित शांति समझौते ने सामान्य शिपमेंट और कम कीमतों की उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अभी भी जटिल बनी हुई है. इन वार्ताओं में किसी भी तरह की बाधा या देरी की आशंका से ऊर्जा की कीमतों में तत्काल उछाल आ सकता है, जो भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति की उम्मीदों और सेक्टर के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा.
भारतीय बाजार का आउटलुक: निफ्टी और टेक्निकल्स
घरेलू स्तर पर, Nifty 50 इंडेक्स सोमवार को 24,102 पर बंद हुआ, जिसने 'डोजी' कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया, जो खरीदारों और विक्रेताओं के बीच अनिर्णय का संकेत देता है. तकनीकी विश्लेषक इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि इंडेक्स 24,189 के करीब एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन का परीक्षण कर रहा है. इस स्तर से ऊपर एक निर्णायक चाल 24,300 की ओर सकारात्मक गति बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है. इसके विपरीत, यदि इंडेक्स इस बाधा को तोड़ने में विफल रहता है, तो यह 23,900–24,189 की सीमा में समेकित (consolidate) हो सकता है. सपोर्ट लेवल वर्तमान में 23,800–23,900 जोन में पहचाने गए हैं, जो प्रमुख मूविंग एवरेज के अनुरूप हैं.
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशक आज तीन प्रमुख ट्रिगर्स पर नजर रख सकते हैं. पहला, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही पर कोई भी आगे की आधिकारिक जानकारी, क्योंकि यह कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेगा और घरेलू तेल विपणन कंपनियों को प्रभावित करेगा. दूसरा, 24,100 के निशान से ऊपर Nifty 50 की स्थिरता, जो यह संकेत दे सकती है कि क्या तेजी की गति वैश्विक बाधाओं का सामना कर सकती है. अंत में, वैश्विक तकनीकी भावना, विशेष रूप से व्यापक बाजार Alphabet की हालिया अस्थिरता पर कैसे प्रतिक्रिया करता है, क्योंकि यह अक्सर भारतीय बाजार में आईटी और प्रौद्योगिकी से संबंधित शेयरों के लिए टोन सेट करता है.
