ग्लोबल बूस्टर से बाजार में मजबूती की उम्मीद
आज भारतीय शेयर बाजार में एक शानदार शुरुआत की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण ग्लोबल बाजारों में आई तेजी है। अमेरिकी बाजार (Wall Street) ने पिछले सत्र में अच्छी बढ़त के साथ कारोबार बंद किया था, और एशियाई बाजारों ने भी इस सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाया। इससे घरेलू ट्रेडिंग के लिए एक अनुकूल संकेत मिला है। GIFT Nifty फ्यूचर्स 25,645 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है, जो शुरुआती निवेशक आत्मविश्वास को दर्शाता है। पिछले सत्र में, Dow Jones Industrial Average 0.63%, S&P 500 0.81% और Nasdaq Composite 1.26% चढ़े थे। एशियाई बाजारों में भी जोश दिखा, जापान का Nikkei 225 एक रिकॉर्ड 59,199.31 पर 1.1% बढ़कर बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी बढ़त पर रहे। US Dollar Index (DXY) में थोड़ी नरमी आई है, जो उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए कुछ राहत दे सकती है।
संस्थागत निवेशकों की चाल में उलटफेर
बाजार की चाल में एक महत्वपूर्ण कारक विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख है। 24 फरवरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में करीब ₹103 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह एफआईआई की सतर्कता को दर्शाता है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इसी सत्र में ₹3,161 करोड़ की जोरदार खरीदारी की। यह मजबूत घरेलू संचय विदेशी पूंजी की सतर्कता के साथ एक स्पष्ट अंतर दिखाता है। पिछले सत्र में, प्राथमिक संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टरों में खास मजबूती देखी गई, जिसमें माइनिंग स्टॉक 2.93%, नॉन-फेरस मेटल 2.91% और आयरन व स्टील कंपनियों के शेयर 2.29% चढ़े।
कमोडिटी का असर और रुपया
कमोडिटी की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई। US West Texas Intermediate कच्चा तेल 0.31% बढ़कर लगभग $65.62 प्रति बैरल और Brent कच्चा तेल 0.30% बढ़कर करीब $71.06 प्रति बैरल पर रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग $5,162 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थीं, जबकि MCX पर अप्रैल 2026 के लिए घरेलू सोने के फ्यूचर ₹1,61,242 प्रति 10 ग्राम के आसपास थे। 25 फरवरी को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.01% कमजोर हुआ, जो 90.95 पर बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की शुरुआत में, भारतीय बाजार मजबूत घरेलू प्रवाह और विनिर्माण व इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण संचालित हो रहा था, भले ही वैश्विक अनिश्चितताएं बनी हुई हों।
चिंताएं और जोखिम
सकारात्मक वैश्विक पृष्ठभूमि और DIIs के मजबूत संचय के बावजूद, FIIs द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है। ऐतिहासिक रूप से, FIIs की निरंतर निकासी बाजारों पर दबाव डाल सकती है, जिससे लिक्विडिटी (liquidity) और मुद्रा की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। हालांकि DIIs ने एक बफर प्रदान किया है, लेकिन लंबी अवधि में महत्वपूर्ण विदेशी बिकवाली को अवशोषित करने की उनकी क्षमता बाजार की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल है। 2026 की शुरुआत में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय थीं, क्योंकि यह एक शुद्ध आयातक है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, महंगाई बढ़ सकती है और चालू खाता घाटा (current account deficit) चौड़ा हो सकता है, जो रुपये और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। रुपये में मामूली गिरावट, हालांकि वर्तमान में सीमित है, इसके बढ़ने का जोखिम रखती है, जिससे आयातकों के लिए लागत बढ़ सकती है और महत्वपूर्ण विदेशी ऋण वाले व्यवसायों पर असर पड़ सकता है। 2026 की शुरुआत के विश्लेषक कमेंट्री में DIIs के इनफ्लो (inflow) की स्थिरता पर भी चिंताएं जताई गई थीं, अगर विदेशी भावना में सुधार नहीं होता। साथ ही, कुछ हाई-ग्रोथ स्टॉक्स के वैल्यूएशन (valuation) को लेकर भी चिंताएं थीं। इसके अलावा, Shapoorji Pallonji Group (-1.86%) और Ambani Group (-2%) जैसे बिजनेस ग्रुप्स के पिछले सत्रों में कमजोर प्रदर्शन ने ऐसे कुछ कमजोर पैकेट दिखाए हैं जो हमेशा व्यापक सेक्टर इंडेक्स में नहीं दिखते।
आगे का रास्ता
बाजार प्रतिभागी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के विकसित होने पर बारीकी से नजर रखेंगे, विशेष रूप से प्रमुख केंद्रीय बैंक की नीतियों में कोई बदलाव या महत्वपूर्ण आर्थिक डेटा रिलीज जो रिस्क एपेटाइट (risk appetite) को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए, विदेशी निवेशकों की सावधानी के मुकाबले घरेलू संस्थागत खरीद की निरंतरता सर्वोपरि होगी। प्रमुख कमोडिटी-संबंधित क्षेत्रों का प्रदर्शन, तेल की कीमतों की दिशा और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। FIIs की भावना में किसी भी बदलाव का संकेत वर्तमान आशावादी शुरुआती दृष्टिकोण से बाजार की दिशा को तेजी से बदल सकता है।