स्टॉक जमा करने से आया उछाल, पर असली मांग कहां?
हालिया परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) डेटा बताते हैं कि अमेरिका, यूके, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों में प्राइवेट सेक्टर एक्टिविटी में मजबूती आई है। हालांकि, यह तेज़ी असली कंज्यूमर डिमांड से नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़ी मात्रा में स्टॉक जमा करने (stockpiling) के कारण आई है। अमेरिकी कंपनियों ने तो आने वाली कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई की कमी से बचने के लिए 'पैनिक' बाइंग (panic buying) तक की बात कही है, जो महामारी के दौर की याद दिलाता है। भारत में भी कंपनियां सप्लाई-साइड की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती लागत
इस बीच, माल जमा करने की इस होड़ ने इनपुट कॉस्ट (input costs) बढ़ा दी हैं। भारत के PMI डेटा में पिछले लगभग तीन सालों में दूसरी सबसे ऊंची इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन (input cost inflation) दर देखी गई है, हालांकि मार्च से इसमें थोड़ी नरमी आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का लगातार बंद रहना, खासकर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए एक बड़ा खतरा है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे ऊर्जा लागत, इनपुट खर्च, ट्रेड में बाधाएं और फाइनेंशियल मार्केट पर असर बढ़ने की चिंता है, जैसा कि RBI ने भी नोट किया है।
AI ने पैदा की मार्केट में भारी भिन्नता
इन सब वजहों से मार्केट में बड़ी भिन्नता (divergence) देखने को मिल रही है। MSCI ऑल कंट्री वर्ल्ड इंडेक्स (MSCI All Country World Index) में मामूली बढ़त दिखी है, लेकिन MSCI इंडिया 5.12% और चीन 4.19% गिर गया है। दोनों ही देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल आयात पर काफी निर्भर हैं। इसके विपरीत, AI क्रांति की वजह से दक्षिण कोरिया का मार्केट 62.63% और ताइवान का मार्केट 33.73% चढ़ गया है।
भारत के IT सेक्टर पर AI का खतरा
भारत के लिए AI बूम तत्काल कोई राहत नहीं दे रहा है। HSBC की एक रिपोर्ट ने भारत को 'अंडरवेट' (underweight) कर दिया है, और महंगाई व डिमांड के दबाव से कंपनियों की कमाई (earnings growth) पर असर पड़ने की चेतावनी दी है। वहीं, दक्षिण कोरिया को डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट और AI-ड्रिवन मजबूत अर्निंग्स के चलते अपग्रेड किया गया है। सवाल यह है कि क्या भारत की कंज्यूमर स्ट्रेंथ (consumer strength) ग्लोबल दबावों का सामना कर पाएगी। FMCG सेक्टर में कुछ अच्छे संकेत हैं, लेकिन अल नीनो (El Niño) का डेयरी उद्योग पर संभावित असर जैसी चिंताएं बनी हुई हैं। IT सेक्टर के लिए AI एक व्यवधान (disruption) है, सुरक्षा कवच नहीं। HCL Tech का अनुमान है कि AI उसके 40% रेवेन्यू को प्रभावित कर सकता है, जबकि Infosys मैक्रो इकोनॉमिक्स और टेक्नोलॉजिकल बदलावों के बीच मुश्किल माहौल में काम कर रही है। Persistent Systems और LTTS जैसी कंपनियां AI को इंटीग्रेट कर रही हैं, लेकिन सेक्टर अभी अनिश्चितता का सामना कर रहा है। मौजूदा मार्केट की मजबूती एक नाजुक संतुलन (fragile balance) हो सकती है, जो इन्वेंटरी, पॉलिसी उपायों, AI के प्रति उम्मीदों और डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट फ्लो से टिकी है। यह 'अस्थिर संतुलन' (unstable equilibrium) तब बिगड़ सकता है जब ये सहारा देने वाले कारक कम हो जाएंगे।
