89 रोज़, 60% से ज़्यादा ग्रोथ! भारत बना सुपर-रिच की नई 'हॉटस्पॉट', ग्लोबल अमीरों की गिनती बढ़ी

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
89 रोज़, 60% से ज़्यादा ग्रोथ! भारत बना सुपर-रिच की नई 'हॉटस्पॉट', ग्लोबल अमीरों की गिनती बढ़ी
Overview

दुनिया भर में अमीरों की संख्या अभूतपूर्व तेज़ी से बढ़ रही है। पिछले 5 सालों में हर दिन औसतन **89** लोग **$30 मिलियन** (लगभग **₹250 करोड़**) से ज़्यादा नेट वर्थ (Net Worth) वाले UHNWI (Ultra-High-Net-Worth Individual) बन रहे हैं। इस तेज़ी ने ग्लोबल UHNWI आबादी को **7,13,626** से पार पहुंचा दिया है। हालांकि अमेरिका अभी भी दौलत बनाने में सबसे आगे है, लेकिन भारत ने पिछले 5 सालों में **60%** से ज़्यादा की UHNWI ग्रोथ के साथ एक प्रमुख ग्लोबल वेल्थ मार्केट (Global Wealth Market) के तौर पर अपनी पहचान बनाई है।

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दुनिया भर में अमीरों की दौलत का तूफान

पिछले पांच सालों में, दुनिया में हर रोज़ औसतन 89 ऐसे लोग हुए हैं जिनकी नेट वर्थ $30 मिलियन (लगभग ₹250 करोड़) के आंकड़े को पार कर गई है। इस ज़बरदस्त उछाल के बाद, ग्लोबल अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (UHNWI) की कुल आबादी अब 7,13,626 तक पहुंच गई है। यह ग्रोथ ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

अमेरिका सबसे आगे, चीन की रफ्तार धीमी

दौलत बनाने के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। पिछले पांच सालों में बने कुल नए UHNWIs में से 41% अकेले अमेरिका से हैं। इसके विशाल कैपिटल मार्केट (Capital Markets) और टेक्नोलॉजी-संचालित अर्थव्यवस्था (Technology-driven economy) तेज़ी से दौलत पैदा करने और उसे फिर से निवेश करने में मदद करती हैं। अनुमान है कि 2031 तक दुनिया के 41% UHNWIs अमेरिका में ही होंगे। वहीं, चीन में भी दौलत बन रही है, लेकिन उसकी रफ्तार अमेरिका की तुलना में धीमी पड़ रही है।

भारत का 'सुपर-रिच' सेगमेंट रॉकेट पर

अगर बात भारत की करें, तो यहां की UHNWI आबादी ने पिछले 5 सालों में 60% से ज़्यादा की ग्रोथ दर्ज की है। देश में अब लगभग 20,000 ऐसे लोग हैं। भविष्यवाणियों के अनुसार, 2031 तक यह आंकड़ा 25,000 के पार चला जाएगा, जो भारत को दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते वेल्थ मार्केट (Wealth Markets) में से एक के रूप में स्थापित करेगा।

इस अमीरी की दौड़ के पीछे क्या है?

यह तेज़ दौलत का जमावड़ा सिर्फ बढ़ती एसेट वैल्यू (Asset Values) का नतीजा नहीं है। कई मज़बूत स्ट्रक्चरल फोर्सेज़ (Structural forces) भी काम कर रही हैं, जैसे कि बढ़ती फाइनेंशियलाइजेशन (Financialization), टेक एंटरप्रेन्योरशिप (Tech Entrepreneurship) में तेज़ी और प्राइवेट कैपिटल (Private Capital) की स्केलेबिलिटी। ये फैक्टर, मंदी और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, GDP ग्रोथ से तेज़ रफ़्तार से दौलत बनाने में मदद कर रहे हैं।

बदल रहा है दौलत का नक्शा

दौलत के इस जमावड़े का असर साफ दिख रहा है। प्राइम रियल एस्टेट (Prime real estate) और लग्ज़री एसेट्स (Luxury assets) अक्सर व्यापक आर्थिक गिरावट से सुरक्षित रहते हैं। साथ ही, विकसित देशों में उच्च धन कर (Wealth taxes) और राजनीतिक माहौल के कारण अल्ट्रा-रिच लोग ज़्यादा सक्रिय हो रहे हैं। इससे क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो (Cross-border capital flows) बढ़ रहा है और कुछ लोगों के लिए लाइफस्टाइल भी ज़्यादा मोबाइल हो रहा है। इंडोनेशिया, सऊदी अरब और पोलैंड जैसे बाजारों में भी नए वेल्थ सेंटर (Wealth centers) उभर रहे हैं, जो दौलत के ग्लोबल नक्शे को विविधता दे रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.