दुनिया भर के शेयर बाजार आज बड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। इसकी वजह है बैंक ऑफ अमेरिका की नई भविष्यवाणी, जिसके अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल 3 बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इस आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या हुआ?
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की ओर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के ब्याज दरों को लेकर की गई नई भविष्यवाणी के बाद से वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। बैंक का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल के अंत तक ब्याज दरों में तीन और बार चौथाई-चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिका की बेंचमार्क ब्याज दर 4.25% से 4.5% के दायरे में पहुंच जाएगी। मौद्रिक नीति में इस संभावित बदलाव की आशंका ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर बिकवाली हो रही है।
ब्याज दरें बढ़ने से शेयर बाजार पर असर
जब कोई केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो कंपनियों और आम लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। शेयर बाजार के लिए यह माहौल आमतौर पर मुश्किल भरा होता है। ऊंची दरें आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकती हैं और कंपनियों की भविष्य की कमाई के वर्तमान मूल्य को कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी जैसे ग्रोथ-फोक्स्ड सेक्टर पर इसका असर और भी ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि ये सेक्टर विस्तार के लिए पूंजी पर बहुत निर्भर करते हैं। कर्ज महंगा होने पर निवेशक इन कंपनियों के मूल्यांकन पर फिर से विचार करते हैं, जिससे शेयरों की कीमतों में गिरावट आती है।
एशियाई और यूरोपीय बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में यह प्रतिक्रिया खासकर तेज रही। दक्षिण कोरिया के KOSPI इंडेक्स में करीब 10% की भारी गिरावट आई, जिसके कारण पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) को रोकने के लिए कई बार ऑटोमेटिक ट्रेडिंग हॉल्ट (ट्रेडिंग रोकना) लगाना पड़ा। जापान के निक्केई 225 में 3.5% से ज्यादा की गिरावट आई, वहीं हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स में 1.5% की नरमी दिखी।
यूरोप में भी FTSE 100 इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली। माइनिंग और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट फंड्स जैसे सेक्टरों में नुकसान हावी रहा। यह व्यापक बिकवाली इस बात का संकेत देती है कि निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्राओं की मजबूती पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं।
निवेशक अब क्या देख रहे हैं?
अब बाजार की नजर गुरुवार को जारी होने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स पर है। यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का महंगाई मापने का पसंदीदा जरिया है। निवेशक इस डेटा का बारीकी से विश्लेषण करेंगे कि क्या महंगाई के दबाव में कमी आ रही है या यह अभी भी ऊंची बनी हुई है। अगर PCE डेटा उम्मीद के मुताबिक महंगाई में गिरावट नहीं दिखाता है, तो यह फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता रहने की उम्मीदों को मजबूत कर सकता है, जिससे आने वाले हफ्तों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
