Indian Markets: AI का डर या FII का सहारा? आज कैसी रहेगी Dalal Street की चाल!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Markets: AI का डर या FII का सहारा? आज कैसी रहेगी Dalal Street की चाल!
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार आज यानी **24 फरवरी 2026** को एक सतर्क शुरुआत करने की ओर अग्रसर है। अमेरिकी बाजारों में आई गिरावट और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच यह संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, एशियाई बाजारों में कुछ मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी ने उम्मीद जगाई है।

ग्लोबल बाज़ार से मिले मिले-जुले संकेत

हफ्ते की शुरुआत में ग्लोबल बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। सोमवार को वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में भारी गिरावट देखी गई, जहां डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) 821.91 अंक टूट गया, S&P 500 71.76 अंक और नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) 258.80 अंक नीचे आया। इस बिकवाली की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित असर को लेकर बढ़ी चिंताएं और सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का प्रभाव रहा। वहीं, दूसरी ओर एशियाई शेयर बाज़ारों ने मजबूती दिखाई, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng index) तीन साल के उच्चतम स्तर को छू गया, जो एक मिश्रित तस्वीर पेश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ (Tariff) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कुछ स्पष्टता आई, लेकिन बाज़ार अभी भी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

डालाल स्ट्रीट पर दबाव, पर FIIs की एंट्री

भारतीय इक्विटी बाज़ारों के लिए प्री-ओपनिंग संकेत नरमी का इशारा कर रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) में गिरावट देखी जा रही है, जो घरेलू सूचकांकों में गैप-डाउन ओपनिंग का संकेत दे रहा है। यह 23 फरवरी के सकारात्मक क्लोजिंग के बाद हो रहा है, जहां निफ्टी 141.75 अंक चढ़कर 25,713 पर और सेंसेक्स 479.95 अंक बढ़कर 83,294.66 पर बंद हुआ था। फंड फ्लो में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहाँ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 23 फरवरी को ₹3,843 करोड़ की खरीदारी की। यह पिछले दो दिनों की बिकवाली के विपरीत है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इसी अवधि में ₹1,292 करोड़ के शेयर बेचे। फरवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यह FIIs की खरीदारी एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जहाँ वे पिछले छह हफ्तों में $11 बिलियन तक की बिकवाली कर चुके थे।

वैल्यूएशन और IT सेक्टर पर AI का साया

भारतीय बाज़ार का वैल्यूएशन, यानी P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) ऐतिहासिक रेंज में बना हुआ है, लेकिन तत्काल दबाव का सामना कर रहा है। सेंसेक्स (Sensex) वर्तमान में लगभग 22.9 के P/E पर कारोबार कर रहा है, जो अपने 5-वर्षीय और 10-वर्षीय औसत से नीचे है। इसी तरह, निफ्टी 50 इंडेक्स (Nifty 50 index) का P/E रेश्यो लगभग 22.5 है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 20-22 के करीब है। हालांकि, ग्लोबल टेक सेक्टर और भारतीय IT इंडस्ट्री पर AI से जुड़े खतरे मंडरा रहे हैं। AI टूल्स कोडिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे मुख्य कार्यों को ऑटोमेट कर सकते हैं, जिससे रेवेन्यू मॉडल और वैल्यूएशन पर असर पड़ रहा है। निफ्टी IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई है, अनुमान है कि यह अपने चरम से करीब 30% तक गिर चुका है। इंफोसिस (Infosys) और TCS (TCS) जैसी कंपनियों में तेज गिरावट देखी गई है, जो AI से जुड़ी चिंताओं को दर्शाती है।

बाज़ार के लिए जोखिम और आगे की राह

भारतीय बाज़ार के लिए मुख्य जोखिम ग्लोबल अनिश्चितताओं और स्ट्रक्चरल शिफ्ट्स (Structural Shifts) से जुड़े हैं। IT सेक्टर में AI का प्रभाव लंबे समय तक रेवेन्यू और पारंपरिक आउटसोर्सिंग बिज़नेस मॉडल को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि कुछ विश्लेषक AI को लेकर डर को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मानते हैं और उनका मानना है कि भारतीय IT कंपनियां AI इंटीग्रेशन सर्विसेज देकर अनुकूलन कर सकती हैं, लेकिन तत्काल बाज़ार की प्रतिक्रिया सतर्कता दिखा रही है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) की अप्रत्याशित प्रकृति भी एक छाया बनी हुई है। DIIs की लगातार बिकवाली भी एक बियरिश (Bearish) संकेत है, जो घरेलू बाज़ार में तत्काल अपसाइड पोटेंशियल की कमी का सुझाव देता है, जैसा कि 2025 में भी देखा गया था।

एनालिस्ट का नज़रिया और आगे के संकेत

अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद, कई विश्लेषकों का 2026 के लिए भारतीय बाज़ार पर नज़रिया सतर्क रूप से आशावादी बना हुआ है। सेंसेक्स के लिए लक्ष्य 90,000 से 1,07,000 के बीच रखे गए हैं, जो अर्निंग्स रिकवरी (Earnings Recovery) और संभावित पॉलिसी बदलावों की उम्मीदों से प्रेरित हैं। फिलहाल, बाज़ार के लिए यह देखना अहम होगा कि यह ग्लोबल संकेतों और AI के IT सेक्टर पर पड़ रहे असर से कैसे निपटता है। कुछ लोगों को IT स्टॉक्स में हालिया बिकवाली एक 'अवसर के रूप में दिखाई दे रही है, लेकिन सेक्टर को AI-संचालित बदलावों के प्रति अनुकूलन और पुनर्मूल्यांकन के दौर से गुजरना होगा। निवेशकों की भावना वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, सेंट्रल बैंक नीतियों और अमेरिकी प्रशासन द्वारा किसी भी नए ट्रेड फ्रेमवर्क के वास्तविक कार्यान्वयन से निकटता से जुड़ी रहेगी।

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