Indian Markets Crash: ग्लोबल टेंशन और AI के डर से शेयर बाज़ार में हाहाकार!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Markets Crash: ग्लोबल टेंशन और AI के डर से शेयर बाज़ार में हाहाकार!
Overview

भारतीय शेयर बाज़ारों में शुक्रवार, 21 फरवरी 2026 को भारी गिरावट दर्ज की गई। Sensex और Nifty दोनों में बड़ी गिरावट आई, जिसकी वजह ग्लोबल लेवल पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों का डर और IT सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के असर को लेकर बढ़ी चिंताएं रहीं।

बाजार गिरने की असली वजह?

भारतीय शेयर बाज़ारों में शुक्रवार, 21 फरवरी 2026 को एक बड़ी गिरावट देखी गई। बाजार में आई इस भारी बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल लेवल पर बढ़ता तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चिंताएं रहीं। खास तौर पर IT सेक्टर पर AI के संभावित असर ने निवेशकों को डरा दिया, जिसके चलते शेयर बाज़ार में घबराहट फैल गई।

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

इस गिरावट के चलते BSE Sensex 1,068.74 अंक गिरकर 82,225.92 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 भी 288.35 अंक टूटकर 25,424.65 पर आ गया। इस बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹6.79 लाख करोड़ की कमी आई। बाज़ार में बढ़ी हुई अनिश्चितता का संकेत देते हुए इंडिया VIX (India VIX) यानी बाजार की अस्थिरता सूचकांक में भी उछाल देखा गया।

IT सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

यह गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे बाजार में फैली। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर इस बिकवाली से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। AI के कारण राजस्व (Revenue) में रुकावट की आशंकाओं ने IT शेयरों पर भारी दबाव डाला, जिससे Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, बैंकिंग और एनर्जी जैसे सेक्टर्स ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की।

घरेलू स्थिरता और विदेशी दबाव

घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2026 में अपनी रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखी और नीतिगत रुख को तटस्थ (Neutral) बनाए रखा, जिसका मकसद आर्थिक विकास को सहारा देना था। लेकिन, अमेरिका में ब्याज दरों के लंबा बने रहने की आशंका और बढ़ते क्रूड ऑयल की कीमतें, जो भारत के आयात बिल और महंगाई को बढ़ा सकती हैं, इन ग्लोबल फैक्टर्स के आगे घरेलू स्थिरता फीकी पड़ गई।

स्मॉल-कैप और मिड-कैप पर खतरा?

बाज़ार में जारी गिरावट के बीच, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में, जहां वैल्यूएशन (Valuation) ऐतिहासिक रूप से उच्च पी/ई (P/E) अनुपात पर चल रहा था, अब वे बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय है, जो वैश्विक स्तर पर सतर्क रुख का संकेत देती है।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार में कंसोलिडेशन (consolidation) जारी रह सकता है। निवेशक भू-राजनीतिक घटनाओं, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। RBI का समर्थनकारी रुख और भारत की मजबूत घरेलू मांग बाजार को सहारा दे सकती है, लेकिन अल्पावधि में बाज़ार की दिशा वैश्विक जोखिम सेंटिमेंट (Risk Sentiment) से तय होगी। IT सेक्टर का प्रदर्शन विशेष रूप से देखने लायक होगा।

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